Shimla, 24 November-:सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोडों के विरोध में मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सीटू कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के गजट में प्रकाशित लेबर कोड की प्रतियों को जलाकर अपना रोष व्यक्त किया। इस विरोध में सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, कोषाध्यक्ष जगत राम, जिला महासचिव अमित कुमार, बालक राम, सचिव विवेक कश्यप समेत अनेक मजदूर और संगठन के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
वक्ताओं ने कहा कि मजदूर हितों को कमजोर करने वाली इन नीतियों के खिलाफ 26 नवंबर को देशभर में मजदूर और किसान संयुक्त रूप से प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने लेबर कोडों को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की। सीटू नेताओं का कहना था कि सरकार 29 पुराने श्रम कानूनों को हटाकर वेतन कोड 2019, औद्योगिक संबंध कोड 2020, सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा एवं कार्यस्थिति कोड 2020 लागू कर रही है, जो मजदूरों के लोकतांत्रिक और आर्थिक अधिकारों को सीमित करते हैं।वेतन कोड 2019 पर बोलते हुए नेताओं ने कहा कि यूनिवर्सल न्यूनतम मजदूरी का दावा करने के बावजूद इसकी परिभाषाएँ बड़ी संख्या में असंगठित और घरेलू मजदूरों को दायरे से बाहर कर देती हैं। औद्योगिक संबंध कोड में हड़ताल को कठिन बनाने और 300 तक मजदूरों वाले प्रतिष्ठानों को बिना सरकारी अनुमति छंटनी की छूट देने की आलोचना की गई।संगठन ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा कोड असंगठित और गिग मजदूरों के लिए स्पष्ट और प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करता। वहीं व्यावसायिक सुरक्षा कोड कई क्षेत्रों को सुरक्षा मानकों से बाहर रखता है और निरीक्षण तंत्र को कमजोर बनाता है।सीटू नेताओं ने आरोप लगाया कि इन कोडों को मजदूर संगठनों के विरोध को नज़रअंदाज़ करके लागू किया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अवहेलना है। उन्होंने पुराने श्रम कानून बहाल करने और सभी प्रतिनिधिक मंचों पर व्यापक चर्चा के बाद ही किसी भी सुधार को लागू करने की मांग की।
