मंडी : परी शर्मा – बाबा भूतनाथ ने आज अपने भक्तों को तेलंगाना के महेश्वर के राजराजेश्वर शिवालय के रूप में दर्शन दिए। मंदिर के मंहत देवानंद सरस्वती ने बाबा को अपने हाथों से सजाया जिसके बाद भक्तों ने अपने भोलेबाबा के दर्शन कर शुभ आर्शीवाद लिया। तारा रात्रि से किए जा रहे श्रृंगार का आज 11 वां दिन है।
मंदिर में जहाँ 11 अखंड दीपक कई शताब्दियों से जल रहे हैं और किसी आंधी , तूफान, बारिश, युद्ध से कभी बुझे नहीं है। महेश्वर का पौराणिक महत्व और इतिहास महेश्वर के अत्यंत गौरवशाली पौराणिक इतिहास के कारण ही देवी अहिल्या ने महेश्वर को राजधानी बनाया था । इसके पूर्व महत्वपूर्ण इतिहास में यह शहर पंडित मंडन मिश्र वह उनकी धर्मपत्नी विदुषी भारती देवी की विद्वता से प्रकाशित हुआ करता था व जाना जाता था। फिर इसी स्थान पर जगतगुरु आदि शंकराचार्य से उनके शास्त्रार्थ का गवाह बना व सनातन धर्म को उत्तम दिशा दी। कुछ मतों में बालक शंकर के शंकराचार्य बनने का स्थान भी यही है, जब उन्होंने शास्त्रार्थ में पंडित मंडन मिश्र व उनकी धर्मपत्नी विदुषी भारती देवी को पराजित किया था । वेद, पुराण उपनिषद, वायु पुराण, नर्मदा पुराण, स्कंद पुराण इत्यादि में वर्णित महिष्मति नगरी ही महेश्वर है।
