संजू चौधरी, शिमला: राजधानी शिमला के होटल कारोबारी सरकार के कुछ एक फैसलों से नाराज चल रहे हैं। यही वजह है कि अब होटल कारोबारियों को अपने होटलों में ताले लगाने तक की नौबत आ गई हैं। यह नौबत सरकार की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स और पानी के कमर्शियल बिल से ज्यादा वसूली करने के चलते आई हैं। यही वजह भी है कि अब होटल कारोबारी सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की बात भी कह रहे हैं। होटल कारोबारियों का कहना है कि अगर सरकार उन्हें इसमें कोई राहत नहीं देती है तो मजबूरन होटलों में ताले लगाकर चाबियां सरकार को देनी पड़ेंगी।
टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहेंद्र सेठ ने कहा कि हाल ही में पानी के टैरिफ में 10 फ़ीसदी की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया हैं। इससे शिमला के लगभग 300 होटल व्यावसायियों पर फर्क पड़ा हैं। इस बढ़ोतरी के बाद होटल के पानी का रेट कमर्शियल पानी के रेट से 67.5 फीसदी अधिक महंगा हो गया हैं। हिमाचल के सभी शहरों में होटल व्यस्यायियों से 27 रुपए प्रति किलो लीटर पानी का रेट चार्ज किया जाता है और कोई स्लैब सिस्टम भी नहीं लगता।
वहीं मोहेंद्र सेठ ने कहा कि वह अपनी इस समस्या को लेकर जल्द विधायक हरीश ज़नारथा और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिलेंगे। उनसे पानी के टैरिफ, गार्बेज फीस और होटलों से वसूले जा रहे प्रॉपर्टी टैक्स को रेशनलाइज किए जाने की मांग करेंगे। अगर सरकार से उन्हें कोई राहत नहीं मिलती है तो वह होटलों में ताले लगाकर चाबियां सरकार को सौंपेंगे।
हिमाचल में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दे सकता हैं पर्यटन को नई उड़ान
केंद्र के बजट को लेकर हिमाचल में टूरिज्म को लेकर क्या उम्मीद हैं। इस पर मोहिंद्र सेठ ने कहा कनेक्टिविटी में सुधार करने की जरूरत है और प्रदेश में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होना चाहिए ताकि विदेशों से भी पर्यटक हिमाचल प्रदेश आ सके।
