राहुल चावला, धर्मशाला(TSN): शास्त्री शिक्षकों की बैचवाइज भर्ती पर सरकार की ओर से रोक लगाने पर अभ्यर्थी बिफर गए हैं। शनिवार को काउंसलिंग में भाग लेने पहुंचे दर्जनों अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकार की ओर से काउंसलिंग को रोकना, पात्र अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हैं। अभ्यर्थियों राकेश कुमार व इंदु सहित अन्य का कहना है कि एमए बीएड वालों को शास्त्री काउंसलिंग के लिए कंसीडर किया गया था, जिसके चलते जिला के विभिन्न क्षेत्रों से अभ्यर्थी शनिवार को धर्मशाला पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2017 से लगातार काउंसलिंग में भाग ले रहे हैं। इस बार सरकार ने बीए संस्कृत और एमए संस्कृत वालों को शास्त्री के लिए पात्र माना हैं। हमें यहां पहुंचने पर बताया गया कि सरकार ने काउंसलिंग को रद्द कर दिया हैं। पिछले कल जनरल कैटगरी की काउंसलिंग हो चुकी है, जबकि शनिवार को एससी, एसटी और ओबीसी कैटगरी के अभ्यर्थियों की काउंसलिंग थी, जिसे सरकार ने रद्द कर दिया। वहीं शास्त्री वालों का यह कहना है कि शास्त्री पदों हेतू वे ही पात्र हैं, क्योंकि हमने बीए में संस्कृत पढ़ी हैं।
धर्मशाला पहुंचे अभ्यर्थियों का कहना था कि हमने भी बीए संस्कृत, एमए संस्कृत की है और बीएड की है और संस्कृत के डिप्लोमा किए हुए हैं, साथ ही एमफिल और पीएचडी की हैं। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे वर्ष 2017 से काउंसलिंग अटेंड कर रहे हैं, लेकिन हर बार हमें नकारा जा रहा हैं। सीएम को भेजे पत्र में अभ्यर्थियों ने कहा है कि बीए व एमए संस्कृत वालों को भर्ती के लिए पात्र माना जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि नए आरएंडपी रूल्स के तहत की जा रही भर्ती सही है और बीएड भी जरूरी हैं।
धर्मशाला पहुंचे अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले 20 सालों से वह निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ा रहे ही ओर शिक्षा देने का अनुभव रखते हैं। साथ ही अभ्यर्थियों का यह भी कहना था कि एक ओर सरकार तीसरी कक्षा से संस्कृत शुरू करने की बात कह रही है, जबकि भर्तियों में बीए और एमए संस्कृत वालों को नजरअंदाज किया जा रहा हैं। इस दौरान अभ्यर्थियों ने सीएम को पत्र भेजकर एक सप्ताह के भीतर काउंसलिंग प्रक्रिया पूर्ण करने का आग्रह किया हैं।
