भावना शर्मा: अगर आप हिमाचल प्रदेश के पर्यटन जिला चंबा के इतिहास और संस्कृति से रूबरू होना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कहीं ओर जाने की जरूरत नहीं हैं। चंबा के इतिहास और यहां की समृद्ध संस्कृति की झलक आप चंबा में स्थित भूरी सिंह संग्रहालय में जाकर पा सकते हैं। चंबा की चौगान मैदान के पास ही स्थित है यह भूरी सिंह संग्रहालय प्रदेश का सबसे पुराना और भारत की सबसे पुराने संग्रहालयों में से एक हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि इस संग्रहालय का निर्माण चंबा के शासक ने अपने शासनकाल के दौरान करवा दिया था। उन्होंने ही इस संग्रहालय में रखने के लिए पारिवारिक चित्र और पुरातत्विक महत्त्व की कई शाही वस्तुएं भी दान स्वरूप भेंट की थी।
जी हां संग्रहालय की स्थापना 14 सितंबर 1960 को हुई थी। उस समय चंबा के शासक राजा भूरी सिंह ने इस संग्रहालय का निर्माण करवाया था। इस संग्रहालय की स्थापना के लिए राजा भूरी सिंह ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तत्कालीन महानिदेशक जेपी वोगेल को चंबा बुलाया था राजा के अनुरोध पर जे.पी वोगेल चंबा आए थे और उन्होंने इस संग्रहालय की स्थापना की थी। राजा का इस संग्रहालय को बनाने के पीछे का उद्देश्य चंबा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजना औरत संरक्षित करना था और इन्हीं की दूर गामी सोच का परिणाम यह है कि आज भी ना केवल हिमाचल बल्कि बाहरी राज्य और विदेशों से आने वाले पर्यटक इस संग्रहालय के माध्यम से चंबा जिला के समृद्ध इतिहास और यहां की संस्कृति से रूबरू हो पा रहे हैं।
संग्रहालय की छह गैलरियों में सहेज कर रखा गया हैं चंबा का पूरा इतिहास
भूरी सिंह संग्रहालय वर्तमान समय में गैलरिया हैं जिनमें चंबा जिला का पूरा इतिहास समेट कर रखा गया है इसमें लघु चित्र गैलरी, पुरातत्व गैलरी, नृविज्ञान गैलरी, कास्ट कला गैलरी के साथ ही अन्य गैलरी बनाई गई हैं। वहीं संग्रहालय में लगभग 65 सौ से अधिक विभिन्न प्रकार के प्राचीन और ऐतिहासिक सामग्री को सहेज कर रखा गया है जिसमें ताम्रपत्र, पांडुलिपियों,शिलालेख शारदा, टांकरी, भोटी, गुरुमुखी और फारसी लिपियों में लिखित पांडुलिपियां, लघु चित्र,चंबा रुमाल और 18वीं शताब्दी तक के प्राचीनतम सिक्के, कलाकृतियां पहाड़ी गहने और संगीत वाद्य यंत्र आदि सहेज कर रखे गए हैं।
प्राचीन दस्तावेज देते हैं इतिहास की गवाही
चंबा की भूरी सिंह संग्रहालय में अगर आप चाहते हैं तो यहां आपको अलग-अलग गैलरी में चंबा के राजाओं के जीवन और उनके राजसी रहन सहन की झलक वर्षों बाद भी देखने को मिलेगी। यहां आपको राजाओं के अस्त्र शस्त्र और विदेशी मेहमानों द्वारा भेंट किए गए उपहारों के साथ ही राजा के रंग महल से लाई गई चित्रित दीवारें और दरवाजे तो वहीं 1000 वर्ष पुरानी देवदार की लकड़ी से बनाई गई महात्मा बुद्ध की प्रतिमा भी देखने के लिए मिलेगी।
इसी के साथ है चंबा रियासत से लाई गई पाषाण प्रतिमाएं और मंदिरों में उपयोग होने वाले पत्थर कला के नमूने भी आपको इस संग्रहालय में देखने को मिलेंगे। संग्रहालय में 17 वीं शताब्दी से लेकर 20 वी शताब्दी तक के विभिन्न कलाकारों की ओर से बनाए गए चित्र, विश्व प्रसिद्ध चंबा रुमाल और वहीं कई ऐतिहासिक दस्तावेज जिसमें प्रस्तर धातु, कागज पर लिखित लिपियां, वहीं स्थानीय राजाओं की ओर से मुगल दरबार है या पड़ोसी राजाओं के साथ जमीन की सहमति से जुड़े हर एक दस्तावेज आपको देखने के लिए मिलेंगे । संग्रहालय में आप 950 ईडी का युगाकर बर्मन का ताम्रपत्र देख सकते हैं जो संग्रहालय का प्राचीनतम ताम्रपत्र हैं। इसके अलावा इस गैलरी में 1000 वर्ष पुरानी सराहन पुस्ती भी देख सकते हैं। वहीं प्राचीन कला के दैनिक उपयोग में होने वाली वस्तुओं सहित चांदी से जड़ित हाथी का हौदा भी इस संग्रहालय की शोभा को बढ़ा रहा हैं।संग्रहालय की एक गैलरी में मौर्य काल से लेकर आधुनिक भारत के सभी प्रकार के मुद्राओं का अवलोकन भी आप सकते हैं। इस गैलरी के प्राचीन भारत से लेकर आधुनिक भारत के सभी प्रमुख शासकों की मुद्राओं का एकत्र कर रखा गया हैं। इन सभी के अलावा संग्रहालय में लघु चित्र प्रदर्शनी कक्ष और चंबा के प्राचीन छायाचित्र भी अंकित किए गए हैं ।
वर्ष भर में 35 हज़ार के करीब लोग पहुंचते हैं भूरी सिंह संग्रहालय
जमा में स्थित ऐतिहासिक भूरी सिंह संग्रहालय मलमे आने वाले लोगों की अगर संख्या की बात की जाए तो यहां वर्ष भर में 30 से 35 हजार के करीब पर्यटक, स्थानीय लोग इसे संग्रहालय को देखने के लिए आते हैं। जो भी पर्यटक यहां घूमने के लिए पहुंचते हैं वह इस संग्रहालय में जाना नहीं भूलते।
