बिलासपुर : सुभाष ठाकुर – बिलासपुर-मंडी सीमा पर बन रहे फोरलेन ब्रिज से जहां दोनों जिला के लोगों को लाभ होगा तो वहीं ब्रिज निर्माण के बाद दोनों जिलों की दूरी कम होने से लोगों को आने जाने में समय व पैसे की भी बचत होगी।
बिलासपुर के बरमाणा से मंडी जिला के डैहर के लिए बन रहे इस फोरलेन ब्रिज निर्माण के दौरान एक बड़ी लापरवाही भी देखने को मिल रही है। गोविंद सागर झील पर बन रहे इस ब्रिज निर्माण के दौरान खुदाई के बाद मिट्टी को झील में ही डंप कर दिया जा रहा है। जिससे झील का अस्तित्व खतरे में तो है ही । साथ ही आने वाले समय में मछली उत्पादन पर भी इसका खासा असर देखने को मिलेगा। वहीं ब्रिज निर्माण कर रही कंपनी की इस लापरवाही से स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है और लोगों का कहना है कि अवैध रूप से की जा रही डंपिंग के चलते जहां झील में मछली के उत्पादन पर असर पड़ेगा तो साथ ही झील में पानी चढ़ने के दौरान लोगों की मालकियत जमीन में पानी आने का भी खतरा बन जाएगा।
झील में चल रही डंपिंग को रोकने की मांग की
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन व फोरलेन विभाग के अधिकारियों से जल्द ही इस मामले का संज्ञान लेकर कंपनी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने व झील में चल रही डंपिंग को रोकने की मांग की है।इस बावत मत्यसिकी निदेशालय हिमाचल प्रदेश के निदेशक सतपाल मेहता का मानना है कि फोरलेन निर्माण के दौरान की जा रही अवैध डंपिंग से झील को नुकसान पहुंचने के साथ ही मछली उत्पादन लगातार घटता जा रहा है। जिसको लेकर फोरलेन निर्माण कंपनी को कईं बार अवगत करवाया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी जानकारी दी गयी है ताकि झील में हो रही अवैध डंपिंग को रोका जा सके ।
