शिमला | हिमाचल प्रदेश के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर आई है। कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना से अब राज्य सरकार को 12% नहीं, बल्कि 18% मुफ्त बिजली (फ्री पावर) मिलेगी। कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को प्रदेश के हित में एक बड़ी जीत बताया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल ने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और सरकार को बधाई दी है। वहीं मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने दोनों नेताओं का आभार जताते हुए कहा कि यह सरकार के निरंतर प्रयासों का नतीजा है, जिससे अब राज्य को हर साल लगभग 250 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।
चौहान ने यह भी कहा कि यह अफसोस की बात है कि भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता, जिनमें नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और सांसद शामिल हैं, ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि यह पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण है।
नरेश चौहान ने बताया कि राज्य सरकार ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद यह फैसला आया। इससे पहले वाइड फ्लॉवर हॉल मामले में भी सरकार को बड़ी सफलता मिली थी।
आपदा पर केंद्र से मदद की उम्मीद
नरेश चौहान ने बताया कि प्रदेश में 2023 और 2024 में भारी प्राकृतिक आपदाएं आई हैं और इस बार भी 1,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री लगातार केंद्र से सहायता मांग रहे हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही केंद्रीय टीम मंडी और अन्य प्रभावित इलाकों का दौरा कर सकती है, जिससे राहत पैकेज की उम्मीद जताई जा रही है।
सेब के पेड़ों की कटाई मामला सुप्रीम कोर्ट जाएगा
शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में सेब के पेड़ों की कटाई को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार हाईकोर्ट में पक्ष रख रही थी, लेकिन अब मामला सुप्रीम कोर्ट ले जाया जाएगा। बागवानी मंत्री जगत नेगी ने इस मुद्दे पर अफसरों के साथ बैठक की है। सरकार का कहना है कि जब फसल तैयार हो चुकी थी, ऐसे समय पर पेड़ नहीं काटे जाने चाहिए थे। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदेश सरकार के पक्ष में जनता और न्यायालय का रुख स्पष्ट कर दिया है।
