बिलासपुर :सुभाष ठाकुर (TSN)-बिलासपुर जिला के सबसे प्राचीनतम पुल भजवाणी पुल पुनर्निर्माण को लेकर अब सियासत गरमाने लगी है. गौरतलब है कि भजवाणी का यह पुल राजा अमरचंद ने सन 1889 में बनवाया था। जिला बिलासपुर में सतलुज नदी पर यही एक मात्र पुल था, जिसके माध्यम से सतलुज पार के लोग कहलूर रियासत के मुख्यालय तक पहुंचते थे। वर्ष 1960 में भाखड़ा बांध निर्माण के चलते अस्तित्व में आई गोबिंद सागर झील के बनने के बाद इस पुल का महत्व कम हो गया। वर्ष 1984 तक यह पुल बरकरार था लेकिन इसके बाद रखरखाव न होने के कारण यह पुल अपना अस्तित्व खो बैठा।
भजवाणी पुल पुनर्निर्माण समिति के अध्यक्ष ने बताया ये
बता दें कि भजवाणी पुल के पुनर्निर्माण से बल्ह भलवाणा, औहर, हीरापुर, बैरीदड़ोला, भगेड़, समोह, बैहनाजट्टां, गेहड़वीं व थुराण सहित करीब 40 पंचायतों के लोगों को इसका लाभ पहुंचेगा। वहीं हिमाचल प्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार द्वारा इस पुल के निर्माण को लेकर 103 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किये गए हैं, मगर पुल के दोनों छोरों पर निजी व बीबीएमबी की जमीन पर लोक निर्माण विभाग द्वारा भूमि अधिग्रहण ना किये जाने के चलते इस पुल का पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है। इस बारे में जानकारी देते हुए भजवाणी पुल पुनर्निर्माण समिति के अध्यक्ष देशराज शर्मा ने कहा कि 18वीं शताब्दी में राजाओं के समय में बने भजवाणी पुल हमीरपुर, धर्मशाला व काँगड़ा के लोगों को बिलासपुर, किरतपुर, चंडीगढ़ व दिल्ली जाने के लिए एकमात्र रास्ता इसी पुल से होकर जाता था जो की भाखड़ा बांध निर्माण के बाद गोविंद सागर झील की जद में आने के बाद जलमग्न हो गया था। वहीं बरसातों के बाद गोविंद सागर झील में पानी चढ़ने पर इस पुल को खोल दिया जाता था और मार्च महीने में दरिया से पानी उतरने पर दुबारा इसे जोड़कर लोगों की आवाजाही के लिए शुरू कर दिया जाता था। मगर धीरे धीरे अपनी अनदेखी के चलते दरिया से पानी उतरने पर इस पुल के कुछ ही अवशेष दिखाई पड़ते हैं।
पुल के निर्माण को लेकर उचित कदम उठाए सरकार
वहीं देशराज शर्मा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु से अपील की है कि इस पुल के निर्माण को लेकर जल्द ही उचित कदम उठाए जाएं ताकि बिलासपुर ज़िला की तीन विधानसभा क्षेत्र की क़रीब 40 पंचायतों को इसका लाभ मिल सके।
