संजु चौधरी, शिमला: प्रदेश सरकार की ओर से की गई उपमुख्यमंत्री और सीपीएस की नियुक्तियों के मुद्दे को भाजपा ने एक बार फिर से उठा दिया हैं। इन नियुक्तियों को भाजपा की ओर से असंवैधानिक करार दिया जा रहा हैं। इतना ही नहीं इन नियुक्तियों को लेकर भाजपा ने प्रदेश उच्च न्यायालय में एक पिटीशन विरार की है जिसमें इन नियुक्तियों को लेकर चैलेंज किया गया हैं। यह बात भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं बिलासपुर के विधायक त्रिलोक जम्वाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए कही हैं।
त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि सीपीएस ऑफिस ऑफ प्रॉफिट हैं और यह नियुक्तियां संविधान के खिलाफ हैं। पूर्व कांग्रेस सरकार ने एक बार पहले भी सीपीएस की नियुक्तियां की थी जो कि रद्द कर दी गई थी और इसके बाद वर्तमान सरकार ने फिर वही गलती दोहराई हैं। इस पिटीशन को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता सतपाल जैन हमारे वकील हैं।
त्रिलोक जम्वाल ने कहा की हमें 100 फ़ीसदी विश्वास है कि हमें न्याय मिलेगा, हमें लोकतंत्र और न्यायपालिका में पूरा विश्वास हैं। जल्द ही सभी सीपीएस को अपने पद छोड़ने पड़ेंगे। उन्होंने बताया कि छोटे राज्यों के लिए मंत्री परिषद को लेकर संविधान में रिस्ट्रिक्शन लगाई गई हैं। प्रदेश सरकार को संविधान को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए।
त्रिलोक ने कहा कि संविधान को उठाकर देख लीजिए संविधान में मुख्यमंत्री और मंत्री परिषद का जिक्र हैं पर उप मुख्यमंत्री पद का जिक्र नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने न केवल अपने नेताओं को एडजस्ट करने के लिए कई नियुक्तियां की है पर यह सभी नियुक्तियां संविधान के खिलाफ
