संजीव महाजन,नूरपुर: बीते शुक्रवार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नूरपुर क्षेत्र के दौरे पर थे। ऐसे में यहां हजारों फोरलेन प्रभावितों को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के इस दौरे से काफी उम्मीदें थी,लेकिन इस दौरे में भी इस उम्मीद पर पानी फिर गया जिससे फोरलेन प्रभावित खासे निराश है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का यह दौरा एक बार फिर क्षेत्र के हजारों फोरलेन प्रभावितों की भावनाओं का आहत करने वाला ही सिद्ध हुआ। क्षेत्र के हजारों लोग योजना के कारण उजड़ रहे है लोगों को आशा थी कि मुख्यमंत्री उनकी पीड़ा को समझेंगे लेकिन सरकार ने एक बार फिर उनकी भावनाओं को दरकिनार कर संवेदनहीन होने का परिचय दिया है।
मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं नूरपुर के पूर्व विधायक अजय महाजन ने कहा कि क्षेत्र का य़ह ज्वलंत मुद्दा था बेहतर होता कि मुख्यमंत्री और स्थानीय ज़न प्रतिनिधि उजड़ रहे लोगों के दर्द को समझने का प्रयास करते,लेकिन जनहित के इस ज्वलंत मुद्दे पर न ही वन मंत्री राकेश पठानिया ने कभी मुंह खोला और न ही उनके हितों की पैरवी की। लोगों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री उनके साथ हुए अन्याय के चलते प्रभावितों के दर्द को समझने का प्रयास करेंगे लेकिन इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि इस मसले पर मुख्यमंत्री ने भी एक बात तक नहीं बोली।
महाजन ने बरंडा में डिग्री कालेज खोलने की घोषणा को चुनावी जुमला बताते हुए कहा कि चुनावी बेल पर ऐसी कोरी घोषणाओं से जनता भ्रमित होने वाली नहीं है। महाजन ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय में नूरपुर के कॉलेज के नए भवन, मातृ शिशु अस्पताल, रिट और बरंडा पंचायतों में आधा दर्जन सिंचाई नलकूप और पेयजल योजनायें स्वीकृत की गई थी जिससे जनता को लाभ मिलना था लेकिन वन मंत्री अपने कार्यकाल में उन्हें भी लोगों को समर्पित करवाने में नाकाम रहे । महाजन ने आरोप लगाया कि चार साल पहले ज़सूर में आधुनिक बस स्टैंड और 200 दुकानों का शापिंग कॉम्प्लेक्स बनाकर युवाओं को रोजगार देने के नाम पर बस अड्डे का शिलान्यास किया था लेकिन धरातल पर वहां अब तक एक ईंट नहीं लग पाई ।
महाजन ने कहा कि लोकसभा चुनावों से पहले वन मंत्री ने नूरपुर में कहा था कि वो 5500 पक्के मकान लेकर आए है लेकिन पक्के मकानों की आश में आए दिन गरीब लोगों के कच्चे मकान बरसात के कारण गिर रहे हैं। मकानों के नाम पर भी लोगों से बहुत बड़ा झूठ बोला गया । महाजन ने कहा कि भाजपा सरकार औऱ उसके प्रतिनिधियों की करनी और कथनी से जनता भली भांति परिचित हो चुकी है और इन जुमलों का जबाव जनता चुनाव में देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश मुख्यमंत्री की जनसभा हो और लोग मुख्यमंत्री का संबोधन सुने बिना ही चलें जाए पंडाल में कुर्सियां खाली पड जाए यह सब इनके झूठे आश्वासनों का नतीजा है लोग समझ चुके हैं कि अंतिम समय में केवल घोषणाएं ही होनी है।
