सीमा शर्मा, मंडी: 5 अप्रैल को मजदूरों की मांगों को लेकर संसद को घेरने की तैयारी मजदूर संगठन सीटू की ओर से की जा रही हैं। इस संसद मार्च को सफल बनाने के लिए मजदूर संगठन सीटू और हिमाचल किसान सभा संयुक्त रूप से प्रयास कर रही है इसी कड़ी में रविवार को मंडी के कामरेड ताराचंद में राज्यस्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता सीटू के राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और हिमाचल किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने की।
सम्मेलन में आए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों के लंबे आंदोलन के बाद काले कृषि क़ानून वापिस ले लिए थे और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी क़ानूनी तौर पर करने का वादा किया था लेकिन अभी तक इस बारे सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया हैं। सरकार की इन किसान विरोधी नीतियों के कारण हिमाचल प्रदेश में बागवानी और कृषि क्षेत्र में लगे बागवान भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।मजदूरों के लिए भी ऐसे ही चार श्रम कोड बना दिए गए हैं जिनके लागू होने से मज़दूरों की ओर से लंबे संघर्षों के बाद हासिल अधिकारों को छिने जाने की योजना हैं,जिसके खि़लाफ़ मज़दूरों और किसानों के संगठनों ने 5 अप्रैल को दिल्ली में संसद भवन तक मार्च निकालने का निर्णय लिया हैं।
उन्होंने कहा कि इससे पहले निचले स्तर पर जन जागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया हैं। इसके चलते मजदूरों और किसानों को जागरूक किया जाएगा और पर्चा वितरण किया जाएगा। इसके तहत सभी कामगारों को न्यूनतम 26 हज़ार रुपए वेतन और दस हजार रुपए पेंशन देने, चार श्रम सहिंताओं औऱ संशोधित बिजली विधेयक को वापस लेने,सभी कृषि उत्पादों के लिए एम.एस.पी लागू करने, सभी ग़रीब और मध्यम किसानों के ऋण माफ़ करने और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को पेंशन देने। मनरेगा में दो सौ दिनों का रोज़गार और 600 रुपए दैनिक वेतन देने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने,बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने और आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी से बाहर करने, पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस से केंद्रीय एक्ससाइज ड्यूटी कम करने, सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली को मजबूत करने और सभी आवश्यक खाद्य सामग्री डिपुओं के माध्यम से उपलब्ध करवाने, वन अधिकार क़ानून को सख्ती से लागू करने, पिछड़े तबकों का दमन रोकने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने, सभी नागरिकों के लिए सार्वभौमिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य और शिक्षा सुनिश्चित करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वापिस लेने, सभी के लिए आवास सुनिश्चित करने और अति अमीरों और कारपोरेट घरानों पर टैक्स की दर बढ़ाने और ग़रीबी के लिए घटाने की नीति लागू की जाने की मांग की जाएगी।
सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि 10 फ़रवरी तक ज़िला व खंड स्तर पर सम्मेलन ओर 11 फ़रवरी से 10 मार्च तक घर-घर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा जिसमें एक लाख घरों तक दस्तक दी जाएगी।उसके बाद 15 मार्च को ज़िला व खंड स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
