ऊना : राकेश (TSN)-करुणामूलक परिवार होकर फिर से अपनी आवाज को उठाने के लिए मजबूर हो गए हैं,क्योंकि सरकार द्वारा विधानसभा चुनावो के समय दी गई सहानुभूतियों और आश्वासन केवल भाषणों तक ही रह गए हैं.जिसके कारण यह परिवार खुद को असहाय और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.इसके चलते आज जिला ऊना के लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस में समस्त परिवारों द्वारा प्रेस वार्ता की गई.इस दौरान उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सरकार विपक्ष में थी इन परिवारों की आवाज हर एक जनमंच से उठाई गई थी और कहा गया था कि हमारी सरकार बनते ही करुणामूलक परिवारों को पक्की नौकरी दी जाएगी.इन परिवारों के लिए जो 62500 कि पॉलिसी बनाई गई है उसको खत्म करके एक साथ सभी परिवारों को नियुक्तियां दी जाएगी.जिसमें उनके द्वारा विधानसभा चुनावो के समय जो वादे इन परिवारों के लिए किये गये थे उसके तथ्य भी इन परिवारों द्वारा रखे गए.
करुणामूलक परिवारों का ये कहना
इन परिवारों का कहना है कि हम खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं ! क्या सरकारे हमें एक वोट बैंक का ही जरिया समझती है क्यों इन परिवारों के साथ 20 से 25 सालों से अन्याय होता आया है ! कांग्रेस सरकार बनने के पश्चात यह परिवार अनेकों बार मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री से मिलकर आए लेकिन केवल आश्वासन मिला. करुणामूलक का कहना है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु द्वारा द्वारा आईपीएस अफसर की मृ*त्यु होने के पश्चात उनके बेटे को बिना किसी शर्त से 6 महीने के अंदर करुणामूलक आधार पर नौकरी दे दी. जबकि इस परिवार की सालाना आय लगभग 25 से 30 लाख थी. किस पॉलिसी के आधार पर नौकरी दी गई.जबकि और परिवारों 20 से 25 सालों से पॉलिसी में उलझाया जाता है,गलत नीतियां इन पर जबरन थोपी जाती हैं. समस्त आश्रितो का कहना है कि जिस आधार और जिस पॉलिसी के तहत आईपीएस के बेटे को बिना किसी शर्त से नौकरी दी गई,उसी पॉलिसी के आधार पर हिमाचल प्रदेश के जितने भी करुणामूलक आश्रित हैं जो की 20 से 25 सालों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं उन सभी पारिवारो को एक साथ नौकरिया देकर राहत दी जाए !
