Shimla, Sanju-शिमला नगर निगम के मेयर सुरेंद्र चौहान के कार्यकाल को ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल करने के राज्य सरकार के फैसले पर अब संवैधानिक बहस शुरू हो गई है। इस मामले पर मंगलवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता एडवोकेट अंजली सोनी वर्मा ने राज्य सरकार के इस निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए इसे चुनौती दी है।
अंजली सोनी ने दलील दी कि नगर निगम अधिनियम में इस तरह का संशोधन संविधान के अनुच्छेदों के विपरीत है, क्योंकि स्थानीय निकायों के कार्यकाल और चुनाव से संबंधित प्रावधान संविधान की 74वीं संशोधन अधिनियम के तहत तय हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस तरह से कार्यकाल बढ़ाने का अधिकार नहीं है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों — आशा शर्मा, कमलेश मेहता और सरोज ठाकुर ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर कर खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और शिमला नगर निगम मेयर से जवाब तलब किया है। अदालत ने सभी पक्षों को अपने-अपने लिखित जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।
गौरतलब है कि हाल ही में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में शिमला नगर निगम मेयर और डिप्टी मेयर के कार्यकाल को ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल करने का फैसला लिया गया था। सरकार ने तर्क दिया कि इस कदम से प्रशासनिक स्थिरता और विकास योजनाओं की निरंतरता सुनिश्चित होगी। हालांकि, इस फैसले को लेकर अब अदालत में संवैधानिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गहन चर्चा जारी है।
