अरविंदर सिंह,हमीरपुर(TSN): जोलसप्पड़ में निर्माणाधीन मेडिकल कालेज भवन का निर्माण कार्य में देरी हो रही है। इसे लेकर सचिव स्वास्थ्य विभाग ने कड़ी आपत्ति जताई है ओर इस कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को जारी किए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि जल्द से जल्द इस कार्य को मूर्तरूप प्रदान किया जाए। यह प्रदेश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है और इसका निर्माण समयबद्ध होना चाहिए। सचिव हेल्थ ने इस संदर्भ में स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों के साथ ही ठेकेदार ओर सीपीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों के साथ भी बैठक की। सभी के साथ बैठकर कर निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज की वास्तविक स्थिति के बारे में पूछताछ करने के साथ ही उचित दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है ओर इसके निर्माण कार्य में और देरी नहीं होनी चाहिए। निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 31 जनवरी 2024 तक के निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके अग्रिहोत्री ने बताया कि सरकार जोलसप्पड़ में बन रहे निर्माणाधीन मेडिकल कालेज को लेकर संचीदा है। वर्तमान में क्षेत्रीय अस्पताल में चल रहे मेडिकल कॉलेज में लोगों की काफी भीड़ जमा रहती है। यहां पर जगह की कमी होने की वजह से मरीजों को उपचार लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं। यही वजह है कि जोलसप्पड़ में मेडिकल कालेज का निर्माण जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल्द जोलसप्पड़ में मेडिकल कालेज शुरू हो जाता है तो लोगों को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि सचिव स्वास्थ्य विभाग ने नादौन अस्पताल का भी विजिट कर खास दिशा निर्देश जारी किए हैं। वहां पर वह बीएमओ नादौन से मिले हैं। वहां पर कृष्णा लैब की रिपोर्ट जोकि मरीजों को दूसरे दिन मिल रही थी उसे लेकर भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं समयबद्ध मरीजों को टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध होनी चाहिए। साथ ही कृष्णा लैब प्रबंधन सभी पुख्ता मशीनरी उपलब्ध करने और एक ही दिन में टेस्ट की रिपोर्ट मरीजों को मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीएमओ को कहा गया है कि जगह चिन्हित करें ताकि वहां पर सिटी स्कैन लगाया जा सके। जगह उपलब्ध होने पर नादौन अस्पताल में मरीजों को सिटी स्कैन की सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि नादौन अस्पताल में आठ स्पेशलिस्ट डाक्टर लगाए गए हैं ताकि मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि स्पेशलिस्ट होने की सूरत में यहां मरीजों को दाखिर कर उपचार की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए अनावश्यक तौर पर मरीज को रैफर न करें।
