चन्द्रिका – हिमाचल प्रदेश में यदि थर्ड फ्रंट की बात की जाए तो सीपीआईएम, कांगेस व भाजपा के बाद तीसरा विकल्प है। खास बात ये है कि पिछले विधानसभा चुनावों में सीपीआईएम के एक मात्र वरिष्ठ नेता राकेश सिंघा ने ठियोग विस् से जीत हासिल की थी। अपनी दबंग व निशपक्ष छवि से वे सिंघम के तौर पर भी जाने जाते है। सिंघा ने ठियोग निर्वाचन क्षेत्र से 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी और लगभग 24 वर्षों के बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीपीआईएम का प्रवेश सुनिश्चित किया था। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब सिंघा पहाड़ी राज्य में चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। उन्होंने 1993 में शिमला से चुनाव जीता थ, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तब अयोग्य घोषित कर दिया था।
राकेश सिंघा का जन्म 8 दिसम्बर 1956 को एक बागवान परिवार में हुआ था। उन्होंने होटल कर्मचारियों, दिहाड़ी मजदूरों, जल विद्युत परियोजना मजदूरों और किसानों के प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है। सिंघा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एक छात्र नेता के रूप में की थी ।उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में ठियोग से चुनाव लड़ा , लेकिन विद्या स्टोक्स से हार गए। जिसके बाद राकेश सिंघा ने पांच साल ठियोग में किसानों और कमजोर वर्गों को समर्पित किए।
सिंघा एक अमीर किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई की है. फिर भी, उन्होंने श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक प्रभावशाली योगदान दिया। सिंघा के प्रयासों से आज राज्य में जलविद्युत श्रमिक सबसे अधिक मजदूरी प्राप्त कर रहे हैं।
ठियोग सीट से सीपीआईएम उम्मीदवार राकेश सिंघा
2022 के विधानसभा चुनावों में भी राकेश सिंघा ठियोग सीट से सीपीआईएम के उम्मीदवार है। पार्टी में वे वरिष्ठ नेता है और विधानसभा में जनता से जुड़े मुद्दे उठाते रहे है। अब देखना होगा कि इस विधानसभा चुनावों में वे दोबारा जीत हासिल कर पाते है या नही।
