शिमला :कमल भारद्वाज(TSN)- हिमाचल प्रदेश में सरकार की ओर से नियुक्त मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) मामले में आज उच्च न्यायलय ने बड़ा फैसला सुनाया है।बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट आदेश दिए हैं कि सीपीएस न तो मंत्रियों की तरह काम करेंगे और न ही वे मंत्रियों वाली सुविधाएं लेंगे। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को
उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद भाजपा की ओर से न्यायलय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सतपाल जैन ने कहा कि सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सूक्खू ने 6 विधायकों को सीपीएस नियुक्त किया था । इस नियुक्ति को सतपाल सिंह सत्ती सहित 11 विधायकों ने कोर्ट में चुनोती दी थी । इसके साथ ही एक स्टे एप्लीकेशन भी कोर्ट में दी गयी थी कि इनके कार्य पर रोक लगाई जाए।दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने ये आदेश पारित किए कि यह मंत्रियों वाले कार्य नही करेंगे न ही सुविधा लेंगे।इस मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
महाधिवक्ता अनूप रत्न ने कहा ये
वहीं इस मामले में महाधिवक्ता अनूप रत्न ने कहा कि आज उच्च न्यायलय में सुनवाई के बाद उच्च न्यायलय ने आदेश पारित किये है कि CPS न तो मंत्रियों की तरह कार्य करेंगे और न ही वे मंत्रियों वाली सुविधाएं लेंगे।अनूप रत्न ने कहा कि उच्च न्यायालय को पहले ही रिप्लाई में स्पष्ट कर दिया है कि सीपीएस मंत्रियों की तरह कार्य नही कर रहे हैं केवल मंत्रियों को कार्य मे असिस्ट कर रहे हैं।
