सुभाष ठाकुर, बिलासपुर: प्रदेश में बंद पड़े सीमेंट प्लांट को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। यह प्रदर्शन शनिवार को 24वें दिन में प्रवेश कर गया हैं। प्रदर्शन जितना आगे बढ़ता जा रहा है उतना ही प्रदर्शनकारियों का आक्रोश की बढ़ता जा रहा हैं। यही वजह है कि शनिवार को बिलासपुर सदर के पूर्व विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बंबर ठाकुर व शिमला क्षेत्र के पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने ट्रक ऑपरेटरों के आंदोलन में मुख्य रूप से शिरकत करने के लिए पहुंचे । प्रदर्शन में बीडीटीएस के चेयरमैन लेख राम वर्मा सहित अन्य पदाधिकारी व सदस्य काफी संख्या में मौजूद रहे।
इस अवसर पर ट्रक आपरेटरों ने अडानी का पुतला जलाया। ट्रक ऑपरेटरों ने बीडीटीएस परिसर से लेकर एसीसी गेट तक विरोध रैली निकाली। इस अवसर पर पूर्व विधायक बंबर ठाकुर ने अडाणी समूह की ओर से की गई तालाबंदी की निंदा करते हुए कहा कि ट्रक ऑपरेटरों केे हितों से किसी तरह का खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा, बल्कि इस आंदोलन में वह उनके साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि यहां पर अडानी समूह की तालाबंदी सहन नहीं की जाएगी। इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस सरकार ट्रक ऑपरेटरों के साथ हैं । प्रदेश कांग्रेस सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के प्रति वचनबद्ध हैं। कांग्रेस पार्टी एक ऐसी पार्टी है जो बिना भेदभाव से सभी को एक समान नजर से देखती हैं। इस अवसर पर शिमला क्षेत्र के पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि यह मसला ट्रक ऑपरेटरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मसला हिमाचल की जनता से जुडा हैं ।
इस आंदोलन को पूरे हिमाचल में फैलाया जाएगा। इस आंदोलन के प्रति उनकी भी जिम्मेवारी हैं। वह इस आंदोलन की सफलता के लिए ट्रक ऑपरेटरों के साथ हैं व उनके साथ बैठ कर भावी रणनीति बनाएंगेे कि इस आंदोलन को कैसे कामयाब किया जा सके। उन्होंने प्रदेश एवं केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर शीघ्र ट्रक आपरेटरों के मुद्दे का समाधान करने की मांग की है। पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि यह आंदोलन लंबा जाएगा। यह लड़ाई किसी आम आदमी से नहीं बल्कि विश्व के तीसरे नंबर के अमीर व्यक्ति से है। ट्रक ऑपरेटरों को अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से लड़ना पड़ेगा।
इस दौरान सरकार और अदानी समूह की ओर से उन्हें उकसाने का प्रयास भी किया जाएगा और यदि आप लोग उकसावे में आ गए तो आपका आंदोलन बिखर जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को लड़ने के लिए मातृ शक्ति का होना जरूरी है। इसके लिए बीडीटीएस को महिला मंडलों , स्वयं सहायता समूहों और पंचायती राज संस्थाओं से संपर्क करके उन्हें आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए आगे लाना होगा।
