राहुल चावला,धर्मशाला: प्रदेश में बदलते मौसम के बीच याब गर्मियों में होने वाली आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए प्रशासन भी तैयारियों में जुट गया हैं। गर्मियों के दिनों में जंगलों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती हैं। ऐसे में वन मंडल धर्मशाला इसके लिए पहले ही तैयार हो रहा हैं।
वन मंडल धर्मशाला की बात करें तो यहां 48 फॉरेस्ट बीटस ऐसी हैं, जिन्हें विभाग ने अति संवेदनशील श्रेणी में रखा हैं। विभाग ने फायर सीजन से निपटने के लिए हालांकि कमर कस ली है, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष विभाग को कुछ राहत हैं। विभाग की मानें तो 48 अति संवेदनशील फॉरेस्ट बीटस ऐसी हैं, जिनमें लगभग पिछले 5 साल से हर बार आग लगती हैं। विभाग की ओर से 3 साल के वनों में आग लगने के रिकॉर्ड के आधार पर अति संवेदनशील बीटस चिन्हित की जाती हैं।
जंगलों में आग लगने की बात करें तो पिछले वर्ष जनवरी माह से ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आना शुरू हो गई थी और मार्च माह तक करीब 10 मामले सामने आ चुके थे, जबकि इस वर्ष विभाग राहत में हैं। फायर सीजन के लिए विभाग ने रेंज लेवल पर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए हैं। वन अधिकार समितियों और विलेज फॉरेस्ट मैनेजमेंट सोसायटियों का भी सहयोग आग बुझाने में लिया जाता हैं। फायर वॉलंटियर्स नियुक्त करने की तैयारी विभाग कर चुका हैं। वहीं आम जनता से भी सहयोग मांगा जा रहा हैं।
वन मंडल धर्मशाला के डीएफओ दिनेश शर्मा का कहना है कि जंगल हम सभी के हैं, ऐसे में जंगलों में आग न लगाएं। सुलग रही बीड़ी को जंगल में न फेंके और न ही जंगलों में आग लगाएं। फायर सीजन से निपटने के लिए विभाग तैयार है, लेकिन इसमें जनसहयोग भी अपेक्षित हैं।
