Mandi, dharamveer-मंडी जिले की बल्ह घाटी के ख्यूरी गांव के रहने वाले सन्नी ठाकुर, जो एक दर्दनाक हादसे के बाद 80 प्रतिशत विकलांग हो गए थे, ने एक बार फिर अपने हौंसले और जज़्बे की मिसाल पेश की है। इस बार वह अपनी पत्नी सुमन के साथ भारत से नेपाल तक की लंबी दूरी की पर्यावरणीय यात्रा पर निकले हैं।
देंगे पर्यावरण और वन्य जीव संरक्षण का संदेश
सन्नी इससे पहले मंडी से लेह और लेह से कन्याकुमारी तक दो ऐतिहासिक यात्राएं पूरी कर चुके हैं, जो इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हैं। उनकी यह तीसरी यात्रा “एक पेड़ मां के नाम” और “धीरे चलो, ज़िंदगी बचाओ” जैसे अभियानों के तहत पर्यावरण और वन्य जीव संरक्षण का संदेश लेकर हो रही है।यात्रा की शुरुआत मंडी जिला प्रशासन के एडीसी रोहित राठौर ने हरी झंडी दिखाकर की। सन्नी ठाकुर इस यात्रा के दौरान करीब 6,000 से 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। यह यात्रा नेपाल, काठमांडू, असम होते हुए 25 जून को कुल्लू स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में संपन्न होगी।
आठ वर्षों तक बिस्तर पर रहने के बाद भी नहीं हौंसला कम
सन्नी के साथ इस यात्रा में उनकी धर्मपत्नी सुमन भी हैं, जिन्होंने कहा कि वह इस सफर का हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। यह उनकी शादी के बाद पहली लंबी यात्रा है।सन्नी के पिता सूरज सिंह ठाकुर, जो स्वयं भी पूर्व खिलाड़ी रहे हैं, ने बेटे के अदम्य साहस और संघर्ष को सलाम करते हुए बताया कि सन्नी ने कबड्डी के अभ्यास के दौरान 2008 में गंभीर चोट के कारण विकलांगता झेली। आठ वर्षों तक बिस्तर पर रहने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और 2021-22 में गाड़ी चलाना सीखा। आज वह न केवल सामाजिक सेवा में लगे हैं, बल्कि कमलाह फाउंडेशन नाम की संस्था भी चला रहे हैं, जो जरूरतमंदों की मदद करती है।
