शिमला/कमल भारद्वाज: हिमाचल प्रदेश में आचार संहिता लगने से शिमला में स्मार्ट सिटी शिमला में कार्य ठप पड़े हैं। एंबुलेंस रोड़ समेत वार्डों में कई मरम्मत कार्य होने थे जो नहीं हो सके। इस वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। लोग पहले वार्ड की हर परेशानी पार्षदों को बताते थे। पार्षद उस मुद्दे को हॉउस में मेयर के ध्यान में रखते थे लेकिन जब से नगर निगम का कार्यकाल पूरा हुआ लोगों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं रहा।
एंबुलेंस रोड की कमी खल रही
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हर वार्ड में एंबुलेंस रोड़ बनाया जाना था । जिसको लेकर नगर निगम ने पार्षदों के साथ मीटिंग भी की थी, लेकिन कार्यकाल पूरा होते ही रोड़ का प्रोजेक्ट हवा हवाई हो गया।
वेरिफिकेशन के नाम पर लोग हो रहे परेशान
पार्षदों का कार्यकाल समाप्त होने से लोगों को कैरेक्टर सर्टिफिकेट बनाने में मुश्किल हो रही है। हालांकि MC ऑफिस में सर्टिफिकेट बनाने के लिए अधिकारी बैठें हैं , लेकिन वेरिफिकेशन के नाम पर एक सर्टिफिकेट को बनाने के लिए 3 से 4 दिन लग रहें हैं। पहले पार्षद के एक सिग्नेचर के साथ सर्टिफिकेट बन जाता था। सर्टिफिकेट समय से न बनाने की वजह से लाइब्रेरी कार्ड तक नहीं बन पा रहा।
वार्डों में नहीं हो रहा काम
शिमला के हर वार्ड में मरम्मत कार्य जो सर्दियों के लिए होने थे, पूरी तरह से बंद पड़े हैं। खराब रास्तों को ठीक नहीं किया गया, बाजार के रास्तों की मेटलिंग नहीं की गई, वार्डो में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है,स्ट्रीट लाइट जो खराब पड़ी है उसे भी ठीक नहीं किया गया।
पूर्व पार्षद बोलें वार्डो की हो रही अनदेखी
मज्याठ वार्ड के पूर्व पार्षद दिवाकर शर्मा का कहना है कि नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जो काम करने थे , अभी तक शुरू भी नहीं हुए। कई प्रोजेक्ट रद्द कर दिए। वार्डों की कोई पूछ नहीं है। लोअर बाजार के पूर्व पार्षद इंद्रजीत का कहना है कि नगर निगम ने दुकानों की मरम्मत करनी थी। सर्दी के लिए बाजार के रास्ते को मैटल करना था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
