संजीव महाजन,नूरपुर: आपने किसी इंसान को तो भगवान की भक्ति में रमते हुए और भगवान की भक्ति में दीवाना होते हुए देखा है लेकिन अगर हम कहें कि एक कुत्ता भी भगवान का भक्त सेवक हैं और उस पर भी भगवान की भक्ति की ऐसी दीवानगी चढ़ी हैं कि वह मंदिर में होने वाले पूजा अर्चना में भाग लेने के लिए खुद ही पहुंच जाता हैं तो यह बात आपको अचंभित करने के साथ ही अजीब जरूर लगेगी लेकिन ऐसा ही वाक्य नूरपुर ब्लॉक की पंचायत खज्जन के वार्ड नंबर चार में इन दिनों देखने को मिल रहा हैं। यहां बाबा बालक नाथ के मंदिर में एक कुत्ता रोजाना पूजा के समय पहुंच रहा हैं ओर मंदिर में होने वाली पूजा अर्चना में भाग ले रहा हैं।
इतना ही नहीं बाबा के सेवक इस कुत्ते ने खज्जन गांव के लोगों के साथ ही सिद्ध बाबा बालक नाथ दियोटसिद्ध धाम तक निकाली गई पैदल यात्रा में भी भाग लिया था। सैकड़ों किलोमीटर तक का सफर इस कुत्ते ने पदयात्रा पर निकले जत्थे के साथ पूरा किया और जब यह यात्रा दियोटसिद्ध धाम से वापस खज्जन गांव पहुंची तो यह कुत्ता भी उनके साथ खज्जन गांव पहुंच गया है और अब यहां भी रोजाना बाबा बालक नाथ की मंदिर में होने वाली पूजा अर्चना में शामिल हो रहा हैं।
इस खबर के माध्यम से हमारा उद्देश्य किस तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है लेकिन खज्जन गांव में सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर में सेवा करते आ रहे दीप मेहरा खुद इस कुत्ते के बारे में जो बता रहे है वो भी किसी अचंभे से कम नहीं हैं।
दीप मेहरा ने बताया कि पिछले कुछ दिन पहले वह अपनी संगत के साथ दियोट सिद्ध बाबा बालक नाथ के दर्शनों को पैदल यात्रा पर गए थे। इस दौरान रास्ते में एक कुत्ता उनके साथ यात्रा में चल पड़ा और जैसे उन्होंने उनकी संगत ने पैदल यात्रा की वैसे ही उस अवतारी कुत्ते ने भी इस यात्रा को पूरा किया और फिर वापिस उनके साथ ही आ गया। अनजान जानवर होने के बावजूद भी इसका इनके साथ ऐसा व्यवहार ऐसा था मानो जैसे इन्होंने ही इसका बचप से पालनपोषण कीया हो। दीप मेहरा बताते हैं कि यह बाबा का सेवक अब रोज सुबह शाम जैसे ही मंदिर का पुजारी पूजा अर्चना करता है वैसे ही यह तैयार हो कर मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुंच जाता है और पूरा दिन मंदिर या पुजारी के घर में ही रहता हैं। इस कुत्ते के इस तरह के बर्ताव को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे और इस कुत्ते का इंसानों जैसा व्यवहार देखकर हैरान हो रहे हैं ।
पुजारी दीप मेहरा ने कहा की जब हम दियोट सिद्ध बाबा बालकनाथ सिद्ध पीठ की पैदल यात्रा पर गए तो हमारे साथ एक अनूठा वाकया हुआ। रास्ते में लंज में जब हम पैदल यात्रा करते हुए जा रहे थे तो यह बाबा जी का भक्त यह कुत्ता भी हमारे साथ यात्रा में शामिल हो गया। पहले तो हमने ध्यान नहीं दिया पर जब काफी दूर तक चले गए तो हमने देखा कि यह हमारे साथ ही चला हुआ हैं तो तब हम सोचने पर मजबूर हुए कि जो हमारे पालतू जानवर जिन्हें हम खाना खिलाते वह तो घर पर हैं और यह कुत्ता जिसे हम जानते नहीं यह हमारे साथ चल पड़ा हैं।
उन्होंने बताया कि पूरी यात्रा में लगभग 150-160 किलोमीटर तक यह कुत्ता हमारे साथ जत्थे के चलता रहा। इसका व्यवहार हम लोगों के साथ ऐसा रहा कि जैसे यह हमारा पालतू जानवर है और हमने बचपन से पाला हो। उसके बाद जब हम शहतलाई पहुंचे तो वहां हम एक सराए में रुके। हमारी गाडियां भी वहीं खड़ी हुई। वहां मौसम खराब था तो लड़कों ने इसे गाड़ी में रख दिया। जब हम बाबा बालकनाथ मंदिर में दर्शनोंके लिए जा रहे थे तो हम इसे साथ लाना भूल गए। वहीं मंदिर क़ई सीढ़ियों में पहुंचते ही बाबा बालकनाथ जी हाजिर हुए तो उन्होंने कहा कि आप हमारे सेवक भक्त को छोड़ आए हो तो हमने कुछ लोगों को वापिस वहां भेजा जहां हम उस कुत्ते को छोड़ आए थे। वह जगह कम-से-कम चार पांच किलोमीटर दूर थी मगर जब भक्त वहां पहुंचे तो देखा कि यह कुत्ता हमारी गाड़ियों के पास ही बैठा हैं।
संगत के लोगों ने उसे वहां नहलाया और अपने साथ ले आए। फिर उसके बाद वह हमारे साथ साथ चलने लगा और वहां बाबा बालक नाथ मंदिर में ड्यूटी पर तैनात पुलिस वालों ने उसे ऊपर जाने वाले रास्ते में रोका। जजत्थे में शामिल सभी लोग बाबा बालक नाथ के दर्शनों के लिए चले गए,लेकिन हैरानी तब हुई जब वह दर्शन करके वापस मंदिर से उतर रहे थे तो यह कुत्ता वहीं बैठकर उनका इंतजार कर रहा था।
दीप मेहरा ने बताया कि पैदल यात्रा करते करते इस कुत्ते के पैरों में छाले पड़ गए थे। यह धूप से बचने के लिए सड़क के किनारे-किनारे चलता रहा पर हिम्मत नहीं हारा। उन्होंने कहा कि यह बाबा जी करिश्मा है या हमारा इससे कोई पिछले जन्म का को लेना-देना था जो बाबा जी इस जन्म में इसे हमारे पास भेजा हैं ।हम यात्रा करके घर वापिस आ गए ओर इस कुत्ते को भी साथ ले लाए हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इसने गाड़ी में आती बार कहीं भी हमें तंग नहीं किया और अब रोजना जैसे हम अपने बाबा बालक नाथ के मंदिर में सुबह पूजा अर्चना को आते हैं तो यह भी हमारे साथ मंदिर आता है और बाबा जी पूजा अर्चना करता हैं। अब इसे कुदरत करिश्मा ना कहे तो क्या कहें।
