बिलासपुर : सुभाष ठाकुर – घुमारवीं उपमंडल के तहत कंदरौर ब्रिज के समीप गोविंद सागर झील के किनारे चल रही सिचाईं योजना के कार्य में एक बड़ी लापरवाही तब सामने आई, जब डंपिंग के दौरान धड़ल्ले से पहाड़ी की मिट्टी को गोविंद सागर झील में फेंका जा रहा है ।
गौरतलब है कि जलशक्ति विभाग घुमारवीं की तरफ से एक चंडीगढ़ की कंपनी को सिचाईं योजना निर्माण कार्य सौंपा गया है ।ताकि गोविंद सागर झील के पानी को उठाकर सिचाईं के लिए इस्तेमाल किया जा सके, मगर निर्माण कार्य के दौरान कंपनी द्वारा लगाई गई । जेसीबी पहाड़ी की मिट्टी को झील में ही डंप करने का काम कर रहे हैं, जिससे झील का अस्तित्व खतरे में आ गया है । वहीं जब सिचाईं योजना निर्माण कार्य कंपनी के सदस्य से इस बावत पूछा गया तो, वह गोलमोल जबाव देते हुए झील में फेंकी जा रही मिट्टी को बाद में उठाने का बहाना बनाते दिखाई दिया ।
वहीं मात्स्यिकी निदेशालय हिमाचल प्रदेश के निदेशक सतपाल मेहता का कहना है कि गोविंद सागर झील में लगातार मछली उत्पादन में कमी आने की मुख्य वजहों में डंपिंग भी है, जिससे मछलियों की ब्रीडिंग व फीडिंग पर सीधा असर पड़ रहा है । साथ ही उन्होंने इस मामले के सम्बंध में जलशक्ति विभाग से पत्राचार के जरिये बात कर उचित कार्रवाई अमल में लाने की बात कही है ।
