मंडी: परी शर्मा- प्रदेश के जिला मंडी में इन दिनों अंतराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला धूमधाम से मनाया जा रहा है। यहां मनाया जाने वाला शिवरात्रि मेला देवी देवताओं का संगम है। परम्परा से जुड़े इस मेले की कई विशेषता है।
रानियों से सखी प्रेम को नरोल देवियां आज भी निभा रही
शिवरात्रि मेले के दौरान एक सप्ताह 6 देवियां राजमहल में रानियों के निवास स्थान रूपेश्वरी बेहड़े में घुंघट में वास करती हैं। रियासतकाल से चली आ रही देव समागम शिवरात्रि में रानियों से सखी प्रेम को नरोल देवियां आज भी निभा रही हैं। इसके अलवा राज परिवार के कुल देवता देव पराशर भी नरोल में ही विराजमान रहते है और अंतिम दिन जाग का आयोजन कर मंडी की सुरक्षा का वचन देते है।
देव समागम मंडी में सदियों पुरानी परंपरा को आज भी निभाया जा रहा है। छह देवियां बगलामुखी, देवी बूढ़ी भैरवा पंडोह, देवी काश्मीरी माता, धूमावती मां पंडोह, देवी बुशाई माता राज माता कहनवाल व रूपेश्वरी राजमाता न जलेब में शिरकत करती है और न ही पड्डल मैदान में होने वाले देव समागम का हिस्सा बनती है।
बगलामुखी देवी के पुजारी गिरधारी ने कहा कि छह देवियां रानियों की तरह घुंघट डालकर राजमहल में एकांत वास करती हैं और राजमहल में ही रानियों के बेहड़े में वास कर देवियां रानियों से सखियों की तरह बातें करती थीं । उन्होंने कहा कि यह देवियां राजाओं की रियासतें नहीं रहीं , लेकिन देवियां महोत्सव में छोटी काशी मंडी में आती हैं लेकिन मेले में शिरकत करने की बजाए रूपेश्वरी बेहड़े में घुंघट में ही विराजमान रहती हैं, जहां भक्त उनके दर्शनो के लिए काफी संख्या में पहुंचते हैं।
राज परिवार के कुल देवता देव पराशर ऋषि भी विराजते है नरोल में
मंडी जनपद के पराशर ऋषि और देव बुढा बिंगल भी राजा के बेहड़े में ही विराजमान रहते है। देव पराशर ऋषि के पुजारी तीर्थ राज ठाकुर ने बताया कि देवता जिला प्रशासन के निमंत्रण पर दो दिन की पैदल यात्रा करने के बाद मंडी पहुंचे है। उन्होंने बताया कि देव पराशर राज घराने के कुल देवता है। शिवरात्री के दौरान पराशर ऋषि सात दिन राज बेहड़े में ठहरते है। वातावरण में फैली असुरी शक्तियों के नाश करने के लिए अंतिम मेले में जाग का आयोजन करके अपने गुर के माध्यम से मंडी की सुरक्षा का वचन देते है।
