धर्मशाला, राहुल चावला-:संविधान हत्या दिवस के अवसर पर धर्मशाला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में सुलह विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था, जिसने संविधान की मूल भावना और नागरिक स्वतंत्रताओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
परमार ने कहा कि आज कांग्रेस स्वयं को संविधान और लोकतंत्र की संरक्षक बताने का प्रयास करती है, जबकि इतिहास इस बात का साक्षी है कि सत्ता बचाने के लिए उसी कांग्रेस ने देश में आपातकाल लागू कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कठोर प्रतिबंध लगाए गए थे।उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान में कई ऐसे संशोधन किए गए, जिनका उद्देश्य न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित करना और कार्यपालिका को अधिक अधिकार देना था। इसके परिणामस्वरूप लोकतंत्र के संतुलन को नुकसान पहुंचा और जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। परमार ने कहा कि जबरन नसबंदी अभियान, लोगों का विस्थापन और राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारियां उस समय की सरकार के अलोकतांत्रिक रवैये के उदाहरण हैं।
विपिन परमार ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जिद और सत्ता के प्रति आग्रह के कारण देश को आपातकाल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। हालांकि देशभर में लोकतंत्र समर्थक शक्तियों ने इसका विरोध किया और वर्ष 1977 के आम चुनाव में जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी।उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और अन्य संगठनों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया और जेल यात्राएं कीं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार का भी जिक्र किया, जिन्हें आपातकाल के दौरान लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा था।
प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए परमार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार मीडिया और विरोधी विचारों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के समय कांग्रेस का जो स्वरूप देश ने देखा था, उसकी झलक आज भी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि संविधान देश की आत्मा है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए।
