अनिल कुमार,किन्नौर: जिला किन्नौर में आज भी किसान अपने खेतों में पारंपरिक अनाज की खेती कर रहे हैं। प्राकृतिक तरीके से यह अनाज यहां खेतों में उगाया जा रहा हैं। इस अनाज को किसानों की पर से किन्नौर जिला के मुख्यालय रिकांगपिओ में शुक्रवार को आयोजित जिलास्तरीय किसान मेले में लगाया गया हैं। इस मेले में मुख्य अतिथि प्रदेश के रूप में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी उपस्थित रहे। इस दौरान जगत सिंह नेगी का रिकांगपिओ बचत भवन में जिला के किसानों व कृषि विभाग के अधिकारियों ने भव्य स्वागत किया व बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने किसान मेले में द्वीप प्रजवलित कर मेले की शुरुआत की। इस दौरान उपायुक्त किन्नौर तोरुल एस रवीश, एसपी किन्नौर विवेक चहल, एसडीएम कल्पा, शशांक गुप्ता आदि भी मौके पर मौजूद रहे।
किसान मेले में कृषि विभाग के आत्मा परियोजना के जिला के डिप्टी प्रोजेक्ट डारेक्टर बलवीर सिंह ने कहा कि किन्नौर जिला में लोकल बीज काउनी, कोदा, चोलाई, बित्थू, राजमाह, हरे मटर, काले मटर, ज्वाला राजमाह, माश, ओगला, फाफड़ा,लोकल गेहूं सहित अन्य अनाज जो अब विलुप्त होने की कगार पर है इनके संरक्षण हेतू विभाग लगातार काम कर रहा हैं। प्राकृतिक खेती पर भी आत्मा प्रोजेक्ट की ओर से किसानों के मध्य जाकर जानकारियां हासिल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किन्नौर जिला में 3235 के आसपास किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैंजो जिला में प्राकृतिक खेती के तहत किसानी व बागवानी की ओर अग्रसर हैं।
उन्होंने कहा कि जिला में प्राकृतिक खेती से निकले अनाज व बागवानी क्षेत्र में सेब व अन्य फ़सल शामिल हैं। उन्हें स्टोर करने हेतू कोल्ड स्टोर निर्माण पर भी सरकार जोर दें रही हैं, ताकि जिला के प्राकृतिक अनाज व बागवानी क्षेत्रों से प्राप्त होने वाले फलों को स्टोर किया जा सके। उन्होंने कहा कि किन्नौर जिला में प्राकृतिक खेती से निकले विभिन्न अनाजों के माध्यम से बाज़ारों में स्वादिष्ट सामग्री भी तैयार की जा रही हैं जिससे किसानों को लाभ प्राप्त हो रहा हैं।
वहीं जिला के रिकांगपिओ निवासी व प्राकृतिक कृषक मनमोहन ने कहा कि वे कृषि विभाग के आत्मा प्रोजेक्ट के साथ वर्ष 2016 से मिलकर काम कर रहे है और उन्होंने किसानी व बागवानी दोनों क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाई हुई हैं। ऐसे में उनके खेतों में अच्छी फ़सल आने के साथ-साथ उन्हें प्राकृतिक खेती से निकले अनाज व फल फ़्रूट के बाज़ार में अच्छे दाम भी मिल रहे हैं। ऐसे में उन्होंने अन्य लोगों को भी प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर होने की सलाह दी हैं।
