शिमला, संजू -:हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड कर्मचारी यूनियन के पूर्व महासचिव हीरालाल वर्मा ने प्रेस वार्ता में कहा कि बोर्ड की वित्तीय स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि मार्च 2024 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट का भुगतान लंबित है, जबकि बोर्ड पर ₹2,890 करोड़ की उदय योजना देनदारी और लगभग ₹125 करोड़ की सब्सिडी बकाया है।
वर्मा ने कहा कि रिटायरमेंट की दर बढ़ने के बावजूद नई भर्तियां नहीं हो रही हैं, जिससे बिजली आपूर्ति तंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेताया कि मौजूदा हालात में बोर्ड की सेहत को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।उन्होंने यूनियन की नई राज्य कार्यकारिणी के गठन की जानकारी भी दी, जिसमें अध्यक्ष नितीश भारद्वाज और महामंत्री प्रशांत शर्मा समेत 35 पदाधिकारी शामिल हैं।हीरालाल वर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक 2025 पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, यह विधेयक निजीकरण का रास्ता खोल देगा, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
वर्मा ने आउटसोर्स कर्मियों और बिजली मित्रों की भर्ती नीति का विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि बिजली बोर्ड 24 घंटे आवश्यक सेवा देने वाला विभाग है, जिसमें कम वेतन पर काम करने वाले अस्थायी कर्मियों से गुणवत्तापूर्ण सेवा की अपेक्षा करना संभव नहीं है।उन्होंने कहा कि बार-बार की गई संरचनात्मक फेरबदल से बोर्ड की स्थिरता पर असर पड़ा है और यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो बोर्ड की स्थिति और खराब हो सकती है।
