धर्मशाला:राहुल चावला(TSN)-फायर सीजन शुरू हो चुका है,कई ऐसे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं,जो कि वनों से सटे होते हैं। ऐसे एरिया में फायर अलर्ट सिस्टम पर ऑनलाइन रिपोर्टिंग के जरिए फायर की सूचना दी जा सकती है।फायर सीजन में वनों में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग की ओर से हर बार हरसंभव प्रयास किए जाते हैं। ऐसे में जंगल में आग लगने पर फायरब्रिगेड को काबू पाने के लिए पानी की समस्या न हो,इसके लिए भी विभाग ने प्रभावी पहल की है।
डीएफओ धर्मशाला दिनेश शर्मा ने बताया कि वन मंडल धर्मशाला में जो भी जल संरक्षण के कार्य हुए हैं,जिसके तहत चैक डैम व वन सरोवर बने हैं, जिनकी जिला डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के माध्यम से मैपिंग भी करवा दी है, जिससे कि फायरब्रिगेड को आग लगने की घटना के दौरान कहीं से पानी की जरूरत पड़ती है तो फायरब्रिगेड के पास पहले से ही मैपिंग के माध्यम से चैक डैम व वन सरोवर की जानकारी होती तो फायर कर्मी वहां से पानी भर सकते हैं।
स्टाफ को सतर्क रहने के निर्देश
डीएफओ ने बताया कि घनी आबादी से सटे वन क्षेत्र में स्टाफ को सतर्क रहने को कहा गया है,जिससे कि छोटी से छोटी आग की घटना की सूचना फायर अलर्ट सिस्टम पर ऑनलाइन रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है।साथ ही संवेदनशील एरिया में वन विभाग का स्टाफ भी मौका पर तैयार रहता है।
अब तक सामने आई 5 घटनाएं
दिनेश शर्मा ने बताया कि वन मंडल धर्मशाला में फायर सीजन के अब तक के 15 दिनों में जंगल में आग लगने की 5 घटनाएं सामने आई हैं,जो कि छोटे स्तर की थी,जिन पर समय रहते आग पर काबू पा लिया गया है। इन मामलों में अभी तक किसी तरह के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
वन में आग लगाई तो हो सकती है एफआईआर
डीएफओ का कहना है कि वनों में आग लगने के दो प्रमुख कारण हैं,एक प्राकृतिक और दूसरा मानवीय कारण है।लंबा ड्राईस्पेल होने की वजह से जंगलों में फैली चीड़ की पत्तियां भी ग्राउंड फायर का कारण बनती हैं।लोगों में ऐसी अवधारणा है कि चीड़ की पत्तियों को जलाने से अच्छी घास निकलती है,जिस कारण लोग खुद भी चीड़ की पत्तियों को आग लगा देते हैं,जो कि अपराध है। यदि कोई व्यक्ति जंगल में आग लगाते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाती है।
