कुल्लू -:हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष के बजट में की गई कटौती को लेकर जनजातीय क्षेत्रों में सियासत तेज हो गई है। पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मारकण्डा ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बजट में कमी का सबसे अधिक असर जनजातीय इलाकों के विकास पर पड़ा है।
कुल्लू में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि पहले जनजातीय क्षेत्रों के लिए बजट में करीब 9 प्रतिशत का प्रावधान किया जाता था, जिससे लगभग 972 करोड़ रुपये विकास कार्यों के लिए उपलब्ध होते थे। लेकिन इस बार यह घटकर करीब 302 करोड़ रुपये रह गया है, जो कुल बजट का पौने चार प्रतिशत ही है।मारकण्डा ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में स्वीकृत कई विकास कार्यों के लिए निर्धारित बजट को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले विकास पुस्तिका में कार्यों का विस्तृत विवरण दिया जाता था, लेकिन इस बार बिना किसी विवरण के ही बजट पारित कर दिया गया।उन्होंने यह भी कहा कि लाहौल घाटी में कोल्ड स्टोर के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये और सब्जी मंडी कारगा के लिए 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वर्तमान में इन परियोजनाओं का कोई पता नहीं है।
इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार की एक योजना का जिक्र करते हुए बताया कि 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी, जिसमें प्रदेश सरकार को 10 प्रतिशत अंश देना था। राज्य सरकार द्वारा अपना हिस्सा न देने के कारण यह राशि मार्च में लैप्स हो गई।पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार जनजातीय क्षेत्रों के विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास कार्य ठप पड़े हैं और लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
