Hamirpur, Arvind-:बीते दिनों हुई बारिश को बागवानी क्षेत्र के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजेश्वर परमार ने कहा कि इससे मिट्टी में पर्याप्त नमी आएगी, जिससे पौधों के विकास को बल मिलेगा। उन्होंने बताया कि बारिश के बाद भूमि में नमी बढ़ने से खाद और उर्वरक पौधों तक आसानी से पहुंचेंगे तथा कोरा पड़ने की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
उपनिदेशक ने बागवानों को सलाह दी कि वे अपने पुराने बगीचों में तौलिए बनाकर निर्धारित मात्रा में गोबर की गली-सड़ी खाद, सिंगल सुपर फास्फेट और पोटाश उर्वरक का प्रयोग करें। खाद को पौधे के तने से लगभग डेढ़ फीट की दूरी पर चारों ओर नाली बनाकर डालना अधिक लाभकारी रहेगा।उन्होंने कहा कि बारिश के तुरंत बाद पुराने पौधों की काट-छांट करना जरूरी है।काटे गए हिस्सों पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड और अलसी के तेल से तैयार पेंट लगाना चाहिए, ताकि रोगों से बचाव हो सके। इसके अलावा पौधों के तनों पर नीला थोथा और चूने का घोल बनाकर एक से डेढ़ फीट की ऊंचाई तक लगाना भी आवश्यक बताया गया। काट-छांट के बाद कॉपर ऑक्सीक्लोराइड दवा का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है।
राजेश्वर परमार ने बताया कि जो बागवान शरद ऋतु में पौधरोपण करना चाहते हैं, वे अपने नजदीकी उद्यान प्रसार केंद्रों से गुणवत्तायुक्त पौधे रियायती दरों पर प्राप्त कर सकते हैं। बारिश के बाद मिट्टी में मौजूद नमी इन पौधों के अच्छे अंकुरण में सहायक सिद्ध होगी।उन्होंने बताया कि सेब, नाशपाती, आड़ू, प्लम और कीवी जैसे शरद ऋतु में लगने वाले पौधे विभाग के उद्यान प्रसार केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। पौधों का वितरण ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति के तहत किया जा रहा है। बागवानी से संबंधित अधिक जानकारी के लिए बागवान विभागीय कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
Chandrika
