संजु चौधरी, शिमला(TSN): सिरमौर जिला के गिरी पार के हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा देने के खिलाफ गुज्जर समुदाय हाईकोर्ट पहुंच गया हैं। गुज्जर समाज ने केंद्र सरकार की ओर से हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा देने के फैसले पर विरोध जताया हैं और हाई कोर्ट में याचिका दायर की हैं। हाईकोर्ट में गुरुवार 30 दिसंबर को इस मामले में सुनवाई हुई और इस मामले में केंद्र सरकार सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया। इस मामले में 18 दिसंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
सीनियर एडवोकेट रजनीश मनिकटाला ने कहा कि गिरिपार के गुज्जर समाज के लोगों ने हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा देने का विरोध करते हुए कोर्ट में इस मामले में याचिका दायर की हैं। इनकी दलील है कि हाटी समुदाय एसटी का दर्जा देने के मापदंड पर खरा नहीं उतर रहा हैं। एसटी का दर्जा देने के लिए शैक्षणिक, आर्थिक पिछड़ापन, एथनिक ग्रुप सहित कई मापदंड हैं,जिसको हाटी समुदाय पूरा नहीं कर रहा हैं। अधिवक्ता रजनीश मनिकटाला ने कहा कि गुज्जर समुदाय कीदलील है कि हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा दिया गया हैं। चाहे वह छोटी जाति का हो या बड़ी जाति का लेकिन कुछ ऐसा वर्ग हैं वह साधन संपन्न हैं। यह वर्ग एसटी के मापदंड पूरा नहीं कर रहा हैं।
गुज्जर समुदाय का कहना है कि हाटी को एसटी का दर्जा देना एक राजनीतिक फैसला हैं। इसमें साधन संपन्न लोग शामिल हैं। गुज्जर समुदाय की यह भी दलील है कि एसटी का दर्जा देने के बाद उनको इन संपन्न लोगों के साथ आरक्षण के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी और इसमें वे पिछड़ जाएंगे। अधिवक्ता रजनीश मनिकटाला ने कहा कि आज यह मामला मुख्य न्यायधीश सहित ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। गुज्जर समाज के लोगों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई हैं। इस याचिका में हाटी को एसटी का दर्जा देने के फैसले को गलत करार दिया गया हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार हिमाचल सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर रिप्लाई फ़ाइल करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में सुनवाई अब 18 दिसंबर को कोर्ट ने तय की हैं।
