संजीव महाजन,नूरपुर: पौंग झील के किनारे बरियाल पंचायत में भैंसों को चराने के लिए डेरा लगा कर बैठे दूसरे राज्यों के गुज्जरों को पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायत पर खदेड़ दिया। हर साल दूसरे राज्यों से सैंकड़ों की तादाद में गुज्जर भैंसे चराने के लिए पौंग झील के प्रतिबंधित क्षेत्र में डेरा जमा कर बैठ जाते हैं और ना ही इन दूसरे राज्य से आने वाले गुज्जरों की कोई पहचान इत्यादि भी नहीं होती ओर इतनी भारी संख्या में अपने मवेशियों को लेकर जहां पहुंच जाते हैं और इनके बीमार मवेशी इतनी संख्या में होते हैं कि स्थानीय किसानों के पशु भी बीमार हो जाते हैं। कुछ तथाकथित लोग अपनी निजी भूमि बता कर गुज्जरों से पैसा भी ऐंठ लेते हैं। ऐसा ही किस्सा बरियाल पंचायत में देखने को मिला हैं।
पंचायत के एक व्यक्ति ने गुज्जरों को अपनी जमीन बताकर डेरा लगवा दिया, लेकिन सोमवार को पूरा प्रशासन पटवारी, कानूनगो सहित वहां पर पहुंचा और जिस भूमि पर इन बुजुर्गों ने डेरा लगाया था वह पौंग डैम की थी। उन्हें वहां से हटाया गया फिर जहां पर इन बुजुर्गों ने डेरा डाला हुआ था वह ज़मीन भी सरकार की निकली, जबकि कुछ लोगों का कहना था यह उनके अपने मलकीत है लेकिन मौके पर निशान देही गई तो यह जमीन सरकारी निकली और गुर्जरों को वहां से भी हटा दिया गया। गुज्जरों के यहां आने पर इसकी आपत्ति ग्रामीणों ने पंचायत प्रधान गुरदयाल सिंह गुलेरिया से की।
गुलेरिया ने वन्यप्राणी विभाग नगरोटा सूरियां व डीएसपी ज्वाली से बात की और कहा था कि यदि कोई भी घटना हो जाती है तो इसके लिए पुलिस प्रशासन जिम्मेवार होगा। उन्होंने मांग उठाई थी की इन गुज्जरों को शीघ्र यहां से हटाया जाए नहीं तो लोगों में भारी रोष हैं।
ज्वाली के डीएसपी मनोज धीमान सोमवार को पुलिस बल के साथ पुलिस के कुछ कमांडो को लेकर बरियाल पंचायत में पहुंच गए। उन्होंने इन गुज्जरों को कहा कि आप यहां से तुरंत चले जाएं वहां उपस्थित ग्रामीणों के साथ मैं मैं – तू तू कर रहे गुज्जरों को पुलिस ने शांत करवाया। वहीं गुज्जरों को वहां से पहले शांतिपूर्ण तरीके से हटने को कहा, लेकिन जब गुज्जर आनाकानी करने लगे तो ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता देख पुलिस प्रशासन ने गुज्जरों को स्थानीय जनता के सहयोग से बलपूर्वक खदेड़ दिया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि यह गुज्जर नहीं यहां से नहीं हटेंगे तो तो उन्हें हम बलपूर्वक हटा देंगे, लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से बड़े ही शांतिपूर्ण तरीके से इन्हें वहां से हटाकर इनके ट्रैक्टर पर समान इत्यादि रखवा कर वहां से भेज दिया गया हैं।
पंचायत प्रधान गुरदयाल सिंह ने कहा कि पौंग झील का खाली क्षेत्र वन्य प्राणी अभ्यारण्य होने के कारण सभी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित है और राजनीतिक संरक्षण के चलते दूसरे रज्यों के गुज्जर डेरा डाल कर स्थानीय ग्रामीणों के साथ झगड़ा करते हैं। जितने भी यह गुज्जर बाहर से आए हुए हैं इनका कोई अता पता नहीं हैं। इसलिए पुलिस प्रशासन की मदद से पंचायत में डेरा लगा कर बैठे गुज्जरों को पूरे दलबल के साथ बाहर किया गया है।
बता दें कि बड़े-बड़े ट्रैक्टरों को लेकर यह गुज्जर यहां पर आ जाते हैं और इतनी भारी संख्या में उनके पास मोटरसाइकिल इत्यादि होते हैं कि पता नहीं चलता कहां से आए हैं। कई गाड़ियों में तो इनके नंबर नहीं होते। उधर स्थानीय जनता ने स्थानीय पंचायत ओर पुलिस प्रशासन का बहुत आभार प्रकट किया जिन्होंने यह फैसला लिया और इन गुज्जरों को यहां से हटा दिया गया।
