By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Reading: 102 साल की उम्र में भी निभाई अंतिम जिम्मेदारी..मौत के बाद भी देश के काम आया फौजी,
Share
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Search
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
© 2022 Dawn News Network Pvt Ltd. | News Media Company | All Rights Reserved.
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal > Blog > himachal > 102 साल की उम्र में भी निभाई अंतिम जिम्मेदारी..मौत के बाद भी देश के काम आया फौजी,
himachalNews

102 साल की उम्र में भी निभाई अंतिम जिम्मेदारी..मौत के बाद भी देश के काम आया फौजी,

Chandrika
Chandrika 2 Min Read
Updated 2025/05/15 at 11:36 AM
Share

Mandi, dharamveer (TSN) – सरकाघाट उपमंडल के गांव सरस्कान के मूल निवासी और मंडी शहर के जेल रोड में रहने वाले सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन अच्छर सिंह ने 102 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली, लेकिन उनके जीवन की आखिरी इच्छा ने उन्हें मृत्यु के बाद भी अमर बना दिया। उनके निधन के बाद, उनका पार्थिव शरीर श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज, नेरचौक को देहदान के रूप में सौंपा गया।

 

सेना में सेवा, युद्ध में वीरता, समाज के लिए प्रेरणा

12 अप्रैल 1923 को जन्मे अच्छर सिंह ने 1940 से 1969 तक भारतीय सेना में सेवा दी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सिग्नल कोर में बसरा, काहिरा, सिसिली और रंगून जैसे महत्वपूर्ण मोर्चों पर वीरता से भाग लिया। 1965 भारत-पाक युद्ध में भी उन्होंने सक्रिय योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें रक्षा पदक 1965 और कुल 8 वीरता पुरस्कारों से नवाजा गया।

रिटायरमेंट के बाद भी युवाओं को दी दिशा

सेवानिवृत्ति के बाद अच्छर सिंह ने जालंधर और आईआईटी कानपुर में एनसीसी प्रशिक्षक के तौर पर युवाओं को अनुशासन और देशभक्ति का पाठ पढ़ाया। वर्ष 2007 में उन्होंने देहदान का निर्णय लिया था, जो पहले IGMC शिमला के लिए था, लेकिन बाद में इसे नेरचौक मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित किया गया।

परिवार ने निभाई अंतिम इच्छा

उनके पुत्र रिटायर्ड बैंक अधिकारी एम. सिंह ने बताया कि पिता की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए, परिवार और गांव के लोगों ने विधिवत रूप से रेडक्रॉस की सहायता से पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, ताकि उनका शरीर मेडिकल शोध और प्रशिक्षण के लिए उपयोग हो सके।

मौत नहीं बनी अंत, बन गई नई शुरुआत

सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन अच्छर सिंह न केवल एक युद्धवीर थे, बल्कि जीवन और मृत्यु दोनों में समाज के प्रति अपनी भूमिका निभाकर एक अविस्मरणीय प्रेरणा बन गए हैं। उनका जीवन एक संदेश है कि सेवा कभी समाप्त नहीं होती – वह शरीर के समाप्त होने के बाद भी जारी रह सकती है।

TAGGED: Mandi Subedar Major Honorary Captain Achhar Singh
Chandrika May 15, 2025
Share this Article
Facebook TwitterEmail Print
Previous Article CBSE परीक्षा में स्वास्तिक वशिष्ठ की शानदार सफलता, 99.6% अंक लाकर हिमाचल का नाम रोशन
Next Article शिमला के शोघी में पत्नी की हत्या, आरोपी पति गिरफ्तार
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Browse by Category
  • Accident
  • Business /Employement
  • crime
  • education
  • election
  • festival
  • health
  • himachal
  • News
  • political
  • political
  • Religion
  • Sports
  • Uncategorized
  • weather
  • शख़्सियत

You Might Also Like

सोलन में लिंक रोड निर्माण को लेकर विवाद, झड़प के बीच एक व्यक्ति की मौत; पुलिस जांच में जुटी

Ago

मां चिंतपूर्णी के दरबार में पहुंचे पंजाब सीएम भगवंत मान का परिवार,विशेष पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद

Ago

किशाऊ बांध परियोजना का रास्ता साफ, हिमाचल पर नहीं पड़ेगा 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ

Ago

3 से 5 जुलाई तक संस्कृति सदन में होगा देवभूमि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल

Ago

1058, Mall Enclave, DAYAL NAGAR,
Ludhiana, Punjab 141001

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?