देवेन्द्र कुमार- सिरमौर जिला में इस बार भी हर्बल रंगों से होली खेली जाएगी। इन रंगों को स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तैयार किया है। इस बार होली और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक ही दिन पर। ऐसे में इन महिलाओं द्वारा तैयार किए ये रंग महिला सशक्तिकरण का एक उदहारण भी है।
लोगों ने पिछली बार भी खूब पसंद किए थे हर्बल कलर
जिला में करीब 86 स्वयं सहायता समूह (एस.एच.जी.) होली के लिए प्राकृतिक अथवा हर्बल गुलाल बनाने का कार्य कर रहे हैं। पांवटा साहिब खंड के लक्ष्य, दिशा, अनुभव, अनन्या, शिवालय, शिव शंकर और भूरेश्वर स्वयं सहायता समूह तथा नाहन का बंधन, पच्छाद का शी हाट, राजगढ़ का प्रगति, शिलाई का गुग्गा महाराज और राधा कृष्ण सहित कुल 12 विलेज आर्गेनाइजेशन, 86 स्वयं सहायता समूहों को होली का रंग तैयार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने लिए अभिप्रेरित कर रहे हैं।समूहों द्वारा तैयार इन रंगों को डीआरडीए के खंड स्तर पर निर्मित हिमिरा शॉप में बेचने के लिए रखा जा रहा है। कुछ समूह अपने स्तर पर रंगों को तैयार कर बाजार में विक्रय कर रहे हैं।पिछले वर्ष करीब 30 स्वयं सहायता समूहो ने होली के प्राकृतिक रंग बनाए थे और लोगों ने इन्हें खूब पसंद किया। इसी से प्रेरित होकर इस बार भी स्वयं सहायता समूहों ने होली के आर्गेनिक रंगों को तैयार करने का अनुकरणीय कदम उठाया है।
रंग को खुश्बुदार बनाने के लिए डाला जाता है इत्र और गुलाब जल
नाहन के समीप देवनी पंचायत का बंधन स्वयं सहायता समूह होली के आर्गेनिक रंगों को तैयार करने की दिशा में पिछले दो वर्षों से आगे बढ़ रहा हैॅ। इस समूह ने इस बार होली के लिए पांच रंगों का करीब 50 किलो हर्बल गुलाल रंग तैयार किया है। समूह ने मोगीनंद के मुख्य मार्ग पर स्टाल लगाकर इस रंग का विक्रय करने की तैयारी कर ली है। समूह की प्रधान शिप्रा राय कहती हैं कि इस बार होली पर आर्गेनिक रंगों की एडवांस बुकिंग आ गई है। रंग को खुश्बुदार बनाने के लिए इसमें इत्र और गुलाब जल भी डाला जाता है। इस प्रकार इन मिश्रणों से त्वचा, आंखों और स्वास्थ्य के अनुकूल आर्गेनिक रंग तैयार हो जाता है।
महिलाएं कर रही आमदनी भी
बंधन स्वयं सहायता समूह ने 100 ग्राम आर्गेनिक रंग का मूल्य 20 रुपये रखा है यानि 200 रुपये प्रति किलो। समूह की सदस्य कहती हैं कि अरारोट का आटा, इत्र, गुलाब जल, पैकिंग और महिलाओं के श्रम को शामिल किया जाए तो अच्छी बचत हो रही है। यदि हम 100 किलो से ऊपर रंग तैयार कर लें तो और अच्छी आय हो सकती है। समूह में शिप्रा राय, ऊषा, संगीता, कमलेश, सीमा, फरीदा, रूपा, रफिया, छीमा देवी, बलकिश और आशिया आर्थिक रूप से निर्भर होने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों से जुड़ रही हैं। होली के रंगों के साथ आचार, पापड़ और दूसरे उत्पाद भी तैयार किये जा रहे हैं।होली के अवसर पर अब सिंथेटिक रंगों की अपेक्षा आर्गेनिक यानि प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल का प्रचलन धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा हैं। सिरमौर जिला में पिछले कुछ सालों से प्रशासन के सहयोग और मार्गदर्शन से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आर्गेनिक रंग तैयार कर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रही हैं। यह एक नई शुरूआत है और अनुकरणीय है।
