धर्मशाला | हिमाचल प्रदेश सरकार ने अब ट्रैकिंग और कैंपिंग के लिए शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत कांगड़ा जिले के प्रसिद्ध त्रियुंड ट्रैक से हुई है। अब तक वन विभाग द्वारा प्रबंधित इस ट्रैक का संचालन अब निजी ऑपरेटरों के जिम्मे होगा, जिससे पर्यटकों के प्रवेश और कैंपिंग व्यवस्थाओं में व्यवस्थित निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।
त्रियुंड ट्रैक में प्रवेश करने वाले पर्यटकों से प्रति एंट्री 100 रुपये वसूले जाएंगे। वहीं, यदि कोई पर्यटक यहां कैंपिंग टेंट लगाना चाहता है, तो उसे प्रतिदिन 275 रुपये का शुल्क देना होगा। यह शुल्क वन विभाग द्वारा निर्धारित किया गया है और निजी ऑपरेटर इसे बदल नहीं सकते। स्थानीय लोगों से उनके हक के हिस्से के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत गलू एंट्री प्वाइंट पर चेक पोस्ट स्थापित किया जाएगा, जहां पर्यटकों की एंट्री और शुल्क की पुष्टि की जाएगी। गर्मियों में ट्रैक पर सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और सर्दियों में सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक प्रवेश की अनुमति होगी। वन विभाग ने 25 वायरलेस वॉकी-टॉकी सेट भी खरीदे हैं, ताकि ट्रैक पर निगरानी बनी रहे और पर्यटकों का आंकड़ा समय-समय पर उपलब्ध हो।
धर्मशाला के डीएफओ अमित शर्मा ने बताया कि यह कदम ट्रैकिंग और कैंपिंग व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। 27 मार्च को ट्रैक के संचालन के लिए निविदाएं खोली जाएंगी, जिसके बाद पता चलेगा कि कौन सा निजी ऑपरेटर इस ट्रैक का प्रबंधन करेगा।
त्रियुंड ट्रैक हिमाचल प्रदेश में ट्रैकिंग और कैम्पिंग के लिए सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है, और अब यह नई व्यवस्था पर्यटकों को सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव प्रदान करेगी।
