मंडी, धर्मवीर-:आधुनिक तकनीक के तेज़ी से बदलते दौर में अब हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) का सिलेबस भी समय से पहले अपडेट किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग ने इंडस्ट्री की मौजूदा मांग और नई तकनीकों को ध्यान में रखते हुए नया सिलेबस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का लक्ष्य है कि आगामी वित्त वर्ष में संशोधित सिलेबस को औपचारिक रूप से पेश कर दिया जाए और उसके बाद नए शैक्षणिक सत्र से इसे लागू किया जा सके।
प्रदेश के आईटीआई संस्थानों में फिलहाल जो पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है, वह तेजी से बदल रही औद्योगिक तकनीकों के अनुरूप नहीं है। इस कारण आईटीआई पास करने वाले कई युवाओं को रोजगार हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग जगत से लगातार यह फीडबैक मिल रहा था कि संस्थानों में पुरानी तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि कंपनियां अब अत्याधुनिक मशीनों और डिजिटल तकनीकों के साथ काम कर रही हैं।तकनीकी शिक्षा निदेशक अक्षय सूद ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग को विभिन्न उद्योग संचालकों से सुझाव प्राप्त हुए हैं। उनका कहना है कि आईटीआई से प्रशिक्षित युवा जब कंपनियों में पहुंचते हैं तो उन्हें नई तकनीक के अनुरूप दोबारा प्रशिक्षण देना पड़ता है। इससे कंपनियों का समय और संसाधन दोनों खर्च होते हैं। कई मामलों में युवा इन आवश्यकताओं को तुरंत पूरा नहीं कर पाते, जिससे उनके रोजगार के अवसर सीमित हो जाते हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए विभाग ने सिलेबस में व्यापक बदलाव का निर्णय लिया है। इस बार केवल पाठ्यक्रम में मामूली संशोधन नहीं, बल्कि इंडस्ट्री विशेषज्ञों की भागीदारी से व्यावहारिक और आधुनिक कंटेंट जोड़ा जाएगा। नए सिलेबस में वही विषय और तकनीकी प्रशिक्षण शामिल किए जाएंगे, जो वर्तमान औद्योगिक जरूरतों के अनुकूल हों। इसके लिए विभिन्न ट्रेड से जुड़े विशेषज्ञों, प्रधानाचार्यों और तकनीकी जानकारों के साथ कई दौर की बैठकों का आयोजन किया जा चुका है।
अक्षय सूद ने बताया कि विभाग का प्रयास है कि बदलाव केवल कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रशिक्षण के स्तर पर भी वास्तविक सुधार दिखाई दे। नई मशीनरी, डिजिटल टूल्स और आधुनिक तकनीकी प्रक्रियाओं को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि विद्यार्थी सीधे उद्योगों में काम करने के लिए तैयार हो सकें। इससे न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्वरोजगार के अवसर भी मजबूत होंगे।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में आईटीआई के सिलेबस में सामान्यतः हर पांच वर्ष में संशोधन किया जाता है, लेकिन इस बार चार वर्ष में ही बदलाव की योजना बनाई गई है। विभाग का मानना है कि तकनीक में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए पाठ्यक्रम को लंबे अंतराल तक स्थिर नहीं रखा जा सकता। हर वर्ष हजारों विद्यार्थी आईटीआई से डिप्लोमा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन अपेक्षित रोजगार न मिलने से वे निराश हो रहे हैं।
नई नीति से उम्मीद की जा रही है कि प्रशिक्षण अधिक व्यावहारिक, तकनीक-आधारित और रोजगारोन्मुख होगा। यदि योजना तय समय पर लागू होती है, तो आने वाले शैक्षणिक सत्र से आईटीआई के विद्यार्थी आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल के साथ तैयार होंगे और प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
