नाहन/देवेन्द्र कुमार– शायद कोई भी यकीन ना करें कि एचआरटीसी नाहन डिपो में एक ऐसा परिचालक है, जिसने अपनी साढ़े 17 साल की नौकरी में कोई भी अवकाश नहीं लिया। तो आइए आज हम आपको मिलवाते हैं एचआरटीसी नाहन डिपो में तैनात परिचालक जोगिंदर सिंह से।
जोगिंदर सिंह का कहना है कि उन्होंने 4 जून 2005 में एचआरटीसी में बतौर परिचालक ड्यूटी ज्वाइन की थी, तब से लेकर आज तक उन्होंने एक भी अवकाश नहीं लिया है। उसमें चाहे साप्ताहिक अवकाश हो होली , दिवाली या फिर अन्य त्यौहार का अवकाश हो। उन्होंने कहा कि वह आगे भी बिना अवकाश लिए निरंतर अपनी सेवाएं निगम और क्षेत्र के लोगों को देना चाहते हैं। जोगिंदर सिंह का कहना है कि उन्होंने कोरोना काल में भी अपनी सेवाएं निरंतर दी है। बेशक उस समय बसें नहीं चली परंतु बस अड्डा परिसर में सुबह 10:00 से शाम 5:00 बजे तक वह हर रोज ड्यूटी पर तैनात रहते थे और अड्डा इंचार्ज के साथ काम करते थे। रेणुका क्षेत्र में कोरोना काल के बाद भी काफी समय तक कई रूट बंद रहे परंतु जिस रूट पर जोगिंदर चलते थे वह रूट कभी बंद नहीं हुआ।
एक बस दुर्घटना ने बदले जोगिंदर के इरादे
दरअसल 18 नवंबर वर्ष 2000 को कोटीधीमान सड़क मार्ग पर निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। जिसमें 14 लोगों ने दम तोड़ दिया था। तभी से जोगिंद्र ने फैसला लिया की अब वो अपना पूरा समय लोगों की सेवा में लगा देंगे। जोगिंद्र ठाकुर ने कहा कि इस बस दुर्घटना के बाद उनको जीवन दान मिला और उनकी भावनाओं में परिवर्तन आया। जोगिंद्र ठाकुर हर रोज नाहन से घाटो रूट पर चलते हैं और 150 से 200 किलोमीटर का सफर बतौर परिचालक तय करते है।
स्टाफ और सवारियों के साथ अच्छा व्यवहार
एचआरटीसी नाहन डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव बिष्ट ने माना कि जोगिंदर सिंह ठाकुर ने आज तक कोई भी अवकाश नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि श्रम कानून के मुताबिक सभी के लिए साप्ताहिक अवकाश जरूरी है ,परंतु अवकाश न लेने को लेकर जोगेंद्र द्वारा प्रतिवर्ष निगम को एफिडेविट दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जोगेंद्र सिंह का व्यवहार स्टाफ और सवारियों के साथ बहुत अच्छा है और उनकी आज तक कोई भी शिकायत उन तक नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि जोगिंदर सिंह से अन्य स्टाफ को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
परिवार के सहयोग के बिना कुछ भी संभव नहीं
संगडाह उपमंडल के रजाणा से ताल्लुक रखने वाले जोगिंद्र सिंह उर्फ जग्गी से कर्मचारी भी प्रेरणा लेने लगे है। परिवार के सहयोग के बिना कुछ भी संभव नहीं है। परिवार की खुशियों में शामिल न होना बडी बात न हो लेकिन गम में भी शामिल नहीं हो सकें यह अपने आप में एक बड़ी बात है।
