शिमला – आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्करज़ यूनियन शिमला सम्बन्धित सीटू की बैठक सीटू कार्यालय शिमला में सम्पन्न हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि यूनियन का वार्षिक सम्मेलन 17 अगस्त को होगा। बैठक में आईजीएमसी के मजदूरों की मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि आईजीएमसी प्रबंधन व ठेकेदार सफाई कर्मचारियों का जमकर शोषण कर रहे हैं। आईजीएमसी में डयूटियों को लेकर भाई – भतीजावाद चल रहा है व कोई भी रोस्टर नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ओवरटाइम डयूटी भी चुनिंदा लोगों को ही दी जा रही है। देश व प्रदेश का कानून कहता है कि डयूटी के लिए रोस्टर बनना अनिवार्य है। वर्षों से अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में कोई रोस्टर नहीं बन रहा है व न ही यह लागू हो रहा है।
आईजीएमसी प्रशासन व प्रबंधन को वर्षों से क्या यह बात मालूम नहीं है। यह सब मिलीभगत से हो रहा है। मजदूरों के शोषण में आईजीएमसी प्रबंधन व ठेकेदार दोनों सहभागी हैं। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि मज़दूरों की मांगों के समाधान के बजाए उनके डयूटी टाइम को एक घण्टा बढ़ा दिया गया है। मजदूरों को कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम व खाना खाने के लिए अलग से कमरे अथवा मेस की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि जनरल डयूटी में कार्य करने वाले मजदूरों के अतिरिक्त वेतन को खत्म कर दिया गया है। मजदूरों की डयूटियां मनमर्जी से बदली जा रही हैं।
जो भी मजदूर अपने शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाते हैं उन्हें न्याय देने के बजाए नौकरी से बाहर निकाल दिया जाता है। अपनी मांगों को बुलंद करने वाले मजदूरों को आईजीएमसी में ठेकेदारों व उनके सुपरवाइजरों द्वारा डराया – धमकाया जाता है व उन्हें सरेआम धमकियां दी जाती हैं। उन्होंने चेताया है कि अगर मजदूरों की मांगों को हल न किया गया तो सीटू के बैनर तले मजदूर आईजीएमसी में वर्ष 2019 की तर्ज़ पर एक बड़े आंदोलन की राह पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने आईजीएमसी प्रबंधन से मांग की है कि मजदूरों की मांगों का समाधान करने के लिए तुरन्त मजदूरों,ठेकेदारों व आईजीएमसी प्रबंधन की त्रिपक्षीय बैठक बुलाई जाए।
