बीबीएन/जगत सिंह: प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ में आचार संहिता का जमकर उल्लंघन हो रहा है। नालागढ़ की चिकनी नदी में अवैध खनन जोरों पर है। खनन माफिया इस कदर बेखौफ है कि उन्हें मानो किसी प्रशासनिक अधिकारी और सरकार का डर ही ना रह गया हो। खनन माफिया दिन-रात जेसीबी मशीनें लगाकर खनन कर रहे हैं और प्रदेश की बेशकीमती खनन सामग्री को लूटने में लगे है। ताजा मामला नालागढ़ के तहत चिकनी नदी का है, जहां पर खनन माफिया ने सरकारी जमीन पर इस कदर खनन के 100-100 फीट के गहरे खड्डे खोद दिए है, मानो यहां पर कभी पहाड़ी ही नहीं थी। पहाड़ से उखाड़े गए 100 से ज्यादा खैर के पेड़ों को चिकनी नदी में छुपा दिया गया है और पहाड़ी पर लटके हुए दर्जनों खैर के पेड़ कभी भी गिर सकते हैं क्योंकि खनन अभी भी जारी है।

स्थानीय लोगों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
स्थानीय लोगों ने भी वन विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि चिकनी नदी में अवैध खनन जोरों पर चल रहा है और यह खनन एक दिन से नहीं बल्कि कई सालों से हैं। उन्होंने कहा एक ही दिन में सरकारी पहाड़ को उखाड़ा नहीं जा सकता। लोगों का आरोप है कि वन विभाग के अंतर्गत यह जगह आती है और वन विभाग की फॉरेस्ट लैंड पर यह खनन किया जा रहा है। फॉरेस्ट विभाग के खैर के पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है और खैर के पेड़ों को उखाड़ कर उसे चिकनी नदी में छुपाया जा रहा है। लोगों ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर वन विभाग के अधिकारी कहां सो रहे हैं और आचार संहिता में भी खनन का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। वन विभाग के अधिकारी इन पर नकेल क्यों नहीं कसते। स्थानीय लोगों ने यहां तक कह दिया कि वन विभाग के अधिकारी से खनन माफिया की मिलीभगत है जिसके कारण सब लूट कसूट का अवैध धंधा चल रहा है।
डीएफओ नालागढ़ से बात करने की गई कोशिश
इस बारे में जब हमने डीएफओ नालागढ़ यशुदीप सिंह से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। जब उन्हें मैसेज व्हाट्सएप पर भेजा गया तो उन्होंने कहा कि वह सोलन मीटिंग में व्यस्त हैं और आज नालागढ़ कार्यालय में उपस्थित नहीं है।
