शिमला : कमल भारद्वाज ( TSN)- राजधानी में तारों के जाल से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए बुधवार को महापौर सुरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में सभी मोबाइल कंपनियों से लेकर केबल ऑपरेटर के साथ बैठक हुई । बैठक में शहर शहर में लटके तारों की जंजाल और अवैध टावरों को लेकर मोबाइल कंपनियां से चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया की इन तारों की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए निगम कार्य आरंभ कर देगा।बैठक में निगम की आय बढ़ाने का तरीका भी तलाश लिया गया है।
महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि कम्पनियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वह बुधवार से ही शहर में तारों की जंजाल को खत्म करने के लिए अपने लोगों को वार्डों में भेजे। वहां पर निगम के पार्षद के साथ जाकर मौके का दौरा करेंगे। इसके बाद बेतरतीब तरीके से लगी तारों को हटाया जाना है। बैठक में कंपनियों को कहा कि नगर निगम के पास काफी खाली जमीन है। इस जमीन पर टावर लगाने की संभावना तलाशी जाएगी। इसके लिए सभी कंपनियों से लिखित में प्रस्ताव भी मांगे हैं। निगम प्रशासन इस पर काम कर सके इससे निगम को अच्छी खासी आय होगी, शहर में अभी तक जो टावर लगे हैं अवैध रूप से लगे हुए हैं,उन पर पेनल्टी भी लगेगी। मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि सभी कंपनियों ने बिजली बोर्ड को तारे लगाने के18 करोड रुपए दिए हैं। बिजली बोर्ड ने यह पैसा लेने के बावजूद इन की तारों का रखरखाव और इसके लिए कोई भी काम नहीं किया है । इसलिए बिजली बोर्ड को भी एक पत्र लिखा जाएगा। यदि उन्होंने कंपनियों से पैसा लिया है तो इसका रखरखाव भी करना होगा। नगर निगम को भी इसमें से हिस्सा मिलना चाहिए। यह निगम की जमीन पर लगे हैं। निगम इसमें कानूनी तौर पर भी मंजूरी देने से लेकर इससे होने वाली आय का हिस्सेदार है। इसलिए निगम को हिस्सा लेने के लिए राज्य बिजली बोर्ड के अधिकारियों को मेयर की ओर से पत्र लिखा जाना का फैसला लिया है।सुरेंद्र चौहान ने कहा कि भविष्य में शहर में सभी तारें अंडरग्राउंड जाएगी । इसके लिए जक्ट बनने की योजना है। फिलहाल अभी सिस्टम न होने के कारण कुछ इसी तरह से सुधार करना पड़ेगा। इसके बाद इस पर काम किया जा सकेगा।
