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Reading: बीमारी ने एक पिता से दूर कर डाली बेटियां, मजबूर होकर भेजना पड़ा बालिका आश्रम
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बीमारी ने एक पिता से दूर कर डाली बेटियां, मजबूर होकर भेजना पड़ा बालिका आश्रम

admin
admin 6 Min Read
Updated 2022/12/19 at 11:58 PM
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संजु चौधरी, शिमला: माता-पिता अपने बच्चों को खुद से कुछ पल भी दूर नहीं रख सकते हैं। बच्चों के दूर जाने के ख्याल से ही माता-पिता को उन्हें खोने का डर सताने लगता हैं। तो वहीं अगर किसी बाप को अपने जिगर के टुकड़ों को खुद से दूर करना पड़े तो आप समझ सकते हैं कि उसे बाप के दिल पर क्या बीत रही होगी, लेकिन मजबूरी भी ऐसी है कि शिमला में एक बाप को अपने दिल पर पत्थर रखकर यह फैसला करना पड़ा है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के झंझीड़ी इलाके में बीमार पिता मोती लाल को अपनी दो बच्चियों को खुद से दूर करना पड़ा हैं। दो साल पहले मोती लाल को पैरालिसिस का अटैक पड़ा था। इसके दो महीने बाद ही पैरालिसिस होने की वजह से मोतीलाल का रोजगार चला गया। कुदरत ने ऐसा खेल रचा कि दो महीने बाद ही धर्मपत्नी की भी मौत हो गई। अब ना तो उनके बच्चों के पास उनकी मां है और ना ही मोती लाल के पास अपने बच्चों का पालन पोषण करने के लिए कोई रोजगार। ऐसे में उन्हें अपने  चार बच्चों में से दो बेटियों को बालिका आश्रम भेजना पड़ा है।
मोतीलाल की तीन बेटियां और एक बेटा है। मोतीलाल के आर्थिक हालात इतने खराब हैं कि वे न तो अपनी दवाइयां ले सकते हैं और न ही मकान का किराया दे पा रहे हैं। पैरालिसिस से पीड़ित बीमार मोती लाल ने कहा कि जब तक वह स्वस्थ थे, तब तक घर परिवार का गुजर-बसर आसानी से हो रहा था, लेकिन अब हाथ पैर साथ नहीं देते। 2 साल तक जैसे तैसे घर का गुजारा हुआ। बच्चों की मदद से ही घर पर सब काम करते हैं, लेकिन पैरालिसिस होने की वजह से रोजगार के साधन नहीं हैं, ऐसे में उन्होंने अपनी दो बेटियों को आश्रम भेजने का मन बनाया हैं।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की मदद से दोनों बेटियां आश्रम में रहकर पढ़ाई करेंगी, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। वहीं सीडब्ल्यूसी की चेयरपर्सन अमिता भारद्वाज ने मोतीलाल से बड़ी बेटी और छोटे बेटे को भी आश्रम भेजने चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट भेजने के लिए मन बनाने की बात कही है, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके। चेयरपर्सन अमिता भारद्वाज ने मोतीलाल के लिए जिला प्रशासन से भी मदद दिलवाने के लिए संपर्क करने की बात कही हैं।
बता दें कि मोती लाल के चार बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटियां और एक बेटा हैं। बड़ी बेटी की उम्र 14 साल, दूसरी बेटी की उम्र 10 साल, तीसरी बेटी की उम्र 7 साल जबकि सबसे छोटे बेटे की उम्र 6 साल हैं। बेटी मुस्कान ने बताया कि दो साल पहले पिता बीमार हुए। उसके बाद मां का साया भी सिर से उठ गया। अब सब बच्चे मिलकर घर पर पिता की मदद करते हैं। स्कूल जाने से पहले सारा काम कर स्कूल जाते हैं। उन्हें उम्मीद है कि पिता जल्द स्वस्थ होंगे और पहले की तरह काम पर जाने लगेंगे।
वहीं पैरालिसिस से ग्रसित बीमार मोती लाल ने बताया कि दो साल पहले जब वे रोजाना की तरह दुकान पर काम कर रहे थे, तो शिवरात्रि के दिन अचानक वे बीमार पड़ गए। अस्पताल जाकर पता लगा कि पैरालिसिस का अटैक आया हैं। इसके बाद काम पर जाना भी मुश्किल हो गया। बीमार होने के 2 महीने बाद ही धर्मपत्नी की भी मौत हो गई। बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया। अब बच्चे ही घर पर सारा काम करते हैं। न तो अपने घर परिवार से सहयोग मिलता है और न ही सरकार से।  पड़ोसी ही मदद के लिए आगे आते हैं। बीते एक साल से मकान मालिक ने भी कमरे का किराया तक नहीं लिया हैं। वह बच्चों को अपने से दूर तो नहीं भेजना चाहते, लेकिन इसके अलावा उनके पास कोई चारा नहीं हैं। उन्हें उम्मीद है कि जब वे स्वस्थ होंगे, तो वापस बच्चों को अपने पास बुला लेंगे।
सरकार और प्रशासन से नहीं मिल रही कोई मदद
बता दें कि यह बेहद हैरानी की बात है कि शिमला शहर में ही रहने वाले मोती लाल को सरकार-प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिलती हैं। न तो उन्हें सहारा योजना के तहत पेंशन मिलती है और न ही उनका हिम केयर कार्ड बना हैं। दवाई लेने के लिए भी शिमला से दूर जाना पड़ता हैं। ऐसे में टैक्सी से आने-जाने और फिर दवाई का खर्च इतना है कि वे हर महीने इतना पैसा नहीं खर्च सकते।
ऐसे हालातों के बीच मोती लाल को जरूरत है सरकार-प्रशासन की मदद की। उन्हें दरकार है उन योजनाओं के लाभ की, जिसके वे हकदार हैं। जन हितैषी होने का दावा करने वाली सरकार को मोती लाल की मदद के लिए आगे आना चाहिए, ताकि वह जल्द से जल्द स्वस्थ हो और एक बार फिर बच्चों को अपने पास बुला सकें।
TAGGED: daughters, father health, Shimla
admin December 19, 2022
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