बैजनाथ :राहुल चावला (TSN)- शिव मंदिर बैजनाथ में चढ़ाए गए घृत मंडल ने इस बार घृत मंडल में स्वयं विराजमान हो गए भोलेनाथ और शिवलिंग स्वरूप में तैयार हुए हैं। हर वर्ष यह नया स्वरूप लेता है। घृत मंडल लगभग साढ़े 4 फीट ऊंचा बना है। मकर सक्रांति के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध एतिहासिक शिव मंदिर बैजनाथ में मंदिर के गर्भ गृह में अर्धनारीश्वर शिवलिंग रुपी भगवान शंकर व मां पार्वती पर अढाई कविंटल देशी घी से बने माखन से घृत मंडल बनाया गया। जिसका श्रंगार सूखे मेवों से किया गया ।
घृत मंडल में भोलेनाथ विराजमान,भक्त करेंगे नए स्वरूप के दर्शन
मंदिर में घृत मंडल को बनाने के लिए पिछले चार दिनों से तैयारियां शुरु कर दी थी । देसी घी को पिघला कर माखन बनाने का कार्य 11 जनवरी से शुरु हो गया था । देसी घी को 108 बार पानी से धो कर मक्खन के पेडों के रुप में सुरक्षित रखा गया था और मकर सक्रांति के दिन दोपहर 12 बजे को होने वाली आरती के बाद शिव लिंग पर घृत मंडल चढ़ाने का कार्य शुरु हुआ सबसे पहले शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया गया तत्पश्चात उसके ऊपर बुर्ज पत्र रखा गया। घृत मंडल तैयार होने के बाद श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए सात दिन शिवलिंग पर रहेगा । सात दिन बाद 21 जनवरी को घृत मंडल को शिवलिंग से हटा लिया जाएगा और उसी दिन माखन रूपी प्रसाद को भक्तो में बांटा जाएगा। बैजनाथ शिव मंदिर के अतिरिक्त महाकाल मंदिर, बैजनाथ स्थित पुठे चरण मंदिर तथा संसाल मे मुकटेश्वर नाथ मंदिर में भी घृत मंडल बनाएंगे।सहायक उपायुक्त एवं एसडीएम डीसी ठाकुर का कहना है कि इस बार अढाई क्विंटल शुद्ध घी के माखन से घृत मंडल तैयार किया गया है। 21 जनवरी को सुबह की आरती के बाद शिवलिंग से घृत मंडल हटाकर माखन लोगों को प्रसाद के रूप में बांट दिया जाएगा।
ऐसी है मान्यता:-
मकर सक्रांति पर देसी घी का लेप किए जाने को लेकर अलग अलग कथाएं प्रचलित हैं । मंदिर पुजारी सुरिंद्र आचार्य के अनुसार मंडी रियासत के राजा चंद्र सेन ने भगवान शिव के दर्शन किए और उनके मन में शिव लिंग को मंडी ले जाने की इच्छा पैदा हुई । राजा चंद्रसेन ने इच्छापूर्ति के लिए भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया और इस दौरान राजा अचेत हो गए । अचेत स्थिती में राजा को सपना आया कि एसा करने पर उसकी रियासत का विनाश हो जाएगा । इसका प्रायश्चित करने के लिए राजा ने हर वर्ष एक मन घी से लेप करने का वचन दिया । राजा के न रहने पर स्थानीय लोग दो तीन किलो घी से लेप करने लगे और वर्तमान में यह किबंटलों में पहुंच गया है । कांगड़ा से आये पुश्तैनी पुजारी सदन शर्मा ने बताया कि मान्यता के अनुसार जालंधर दैत्य से युदध के दोरान समस्त देवी देवताओं को जख्म हो गए थे और उन जख्मो पर मरहम लगाने के लिए लेप किया जाता है । चिकित्सकों की माने तो सात दिन तक पवित्र शिवलिंग पर लेप होने व 108 वार ठंडे पानी से धोने के कारण यह घी औषधी का रुप धारण कर लेता है और चर्म रोगों के निवारण के लिए सहायक रहता है ।
