अरविंदर सिंह,हमीरपुर: आज बहुत ही गौरव का अवसर है कि विज्ञान और संस्कृत का अध्ययन-अध्यापन फिर से एक छत्त के नीचे शुरू हो रहा है। इसी समावेशी परंपरा के बल पर भारत पूर्व में विश्व गुरु रहा है। यह बात हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर में मंगलवार को अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र का शुभारंभ करने के बाद मुख्य वक्ता नीकु राम ने कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता तकनीकी विवि के अधिष्ठाता स्कूल अध्ययन प्रो. जयदेव ने की, जबकि जिला भाषा अधिकारी हमीरपुर नीकू राम मुख्य वक्ता और अनौपचारिक संस्कृत केंद्र के प्रदेश संयोजक डॉ सुदेश गौत्तम विशिष्ठ अतिथि रहे। तकनीकी विवि परिसर में अनौपचारिक संस्कृत केंद्र के शुभारंभ अवसर पर संस्कृत भारती हिमाचल प्रदेश के सहयोग से दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर भी शुरू किया गया।
मुख्य वक्ता ने संस्कृत के इतिहास पर क्रमवार चर्चा करते हुए बताया कि किस प्रकार इतिहास में भारतीय ज्ञान परंपरा को नष्ट करने के कुप्रयत्न आक्रांताओं की ओर से किए गए। उन्हीं कुप्रयत्नों के चलते संस्कृत और भारतीय शिक्षा पद्धति में खाई का निर्माण किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में निर्मित है। इसके क्रियान्वयन से भारतीय ज्ञान परंपरा और उसकी संवाहिका संस्कृत भाषा का स्वर्णिम युग पुनः भारतवर्ष में आएगा, यदि भारत के सभी शिक्षण संस्थानों में एक साथ संस्कृत और विज्ञान का पठन-पाठन होगा।
वहीं विशिष्ठ अतिथि ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पाश्चात्य अनुकरण के कारण आई विसंगतियों का अपमार्जन केवल मात्र संस्कृत भाषा के माध्यम से ही संभव है,जिसके लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली की ओर से विभिन्न शिक्षण संस्थानों में इस प्रकार के अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। अधिष्ठाता स्कूल अध्ययन ने कहा कि तकनीकी विवि परिसर में अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र खोलने के लिए केंद्रीय संस्कृत विवि का आभार जताया। इस मौके पर तकनीकी विवि के प्राध्यापक, विद्यार्थी सहित अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र के शिक्षक संदीप कुमार मिश्र, संभाषण शिविर शिक्षक नवीन कौशल मौजूद रहे।
