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श्रम संहिताओं के विरोध में ट्रेड यूनियन व किसान संगठनों का संयुक्त आंदोलन, श्रम अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

Chandrika
Chandrika 2 Min Read
Updated 2025/12/19 at 7:41 PM
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Bilaspur, Subhash-:केंद्र सरकार द्वारा 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नई श्रम संहिताएं लागू किए जाने के विरोध में शुक्रवार को बिलासपुर में संयुक्त ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने जोरदार संयुक्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मजदूर, कर्मचारी और किसान शामिल हुए, जिन्होंने सरकार की नीतियों को श्रमिक विरोधी बताते हुए जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के पश्चात एक प्रतिनिधिमंडल ने श्रम अधिकारी बिलासपुर को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में कहा गया कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करती हैं और रोजगार की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं।संगठनों का आरोप है कि इन संहिताओं को पूंजीपतियों और बड़े उद्योगपतियों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जबकि मजदूरों और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की गई है।

संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने बताया कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने से काम के घंटे बढ़ेंगे, स्थायी रोजगार की जगह ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान कमजोर होंगे।इसके साथ ही किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि मजदूर और किसान दोनों ही सरकार की नीतियों से प्रभावित हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि चारों श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए और पुराने श्रम कानूनों को और मजबूत किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रह सकें। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

विजय शर्मा ने कहा, “नई श्रम संहिताएं मजदूरों के हित में नहीं हैं। इससे न तो रोजगार की सुरक्षा मिलेगी और न ही सामाजिक संरक्षण। सरकार को मजदूरों की आवाज सुननी चाहिए और इन कानूनों को वापस लेना चाहिए।”इस अवसर पर ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) सहित विभिन्न ट्रेड यूनियन संगठनों और किसान संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

TAGGED: Bilaspur citu protest
Chandrika December 19, 2025
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