अनिल नेगी, किन्नौर: किन्नौर जिला कठिन भोगौलिक परिस्थितियों वाला जिला है। यहां बर्फ व अन्य प्राकृतिक आपदाओं की संभावना अधिक होती है ऐसे में विधानसभा चुनावों के समय जिला में आपदाओं से निपटा जा सके इसके लिए जिला प्रशासन पहले ही तैयारियां कर रहा है। इसी बाबत आज उपायुक्त सभागार में विधानसभा निर्वाचन-2022 के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक नेे की। बैठक में अधिकारियों को विधानसभा निर्वाचन के दौरान आपदा प्रभावित क्षेत्रों में ऐहतियाती कदम उठाने बारे दिशा-निर्दश दिए गए।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि किन्नौर जिला कठिन भोगौलिक परिस्थितियों वाला जिला है। यहां बर्फ व अन्य प्राकृतिक आपदाओं की संभावना अधिक होती है। ऐसे में विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत मतदान केंद्रों को जोड़ने वाले मार्गों को चुनाव के दौरान सुचारू रखना अति आवश्यक है ताकि बिना किसी बाधा से चुनावी प्रक्रिया को पूरा किया जा सके।
उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में तैनात अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में भू-स्खंलन व ग्लेशियर प्रभावित क्षेत्र जैसे मलिंग नाला, शलखर नाला, पागल नाला, टिंकू नाला, निगुलसरी, बारंग व रकच्छम इत्यादि क्षेत्रों में मतदान दलों को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने व वापिस लाने के लिए विशेष कदम उठाए जाएं।
इसके अलावा जिले के दुर्गम क्षेत्रों में मतदान दलों की सुविधा के लिए 10 हैलिपैड चिन्हित किए गए हैं व प्रत्येक हैलिपैड के लिए एक संपर्क अधिकारी को नियुक्त किया गया है जो आपात स्थिति में मतदान दलों को मतदान केंद्रों तक लाने व ले-जाने का कार्य सुनिश्चित करेंगें।
इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में विधानसभा निर्वाचन-2022 के दृष्टिगत नियुक्त सेक्टर अधिकारियों के साथ एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें सेक्टर अधिकारियों को वी.वी.पैट मशीन के संचालन बारे जानकारी दी गई। जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लगने के उपरान्त निष्पक्ष चुनाव करवाने व बुनियादी व्यवस्था सुनिश्चित बनाने में सेक्टर अधिकारियों की अहम भूमिका रहती है ओर सैक्टर अधिकारियों का दायित्व बनता है कि वह आदर्श आचार संहिता लगने के बाद सभी सरकारी संपतियों से चुनावी पार्टियों के प्रचार व प्रसार सामग्री को हटवाना सुनिश्चित करें।
