मंडी/परी शर्मा: जाइका वानिकी परियोजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी में निरंतर सुधार हो रहा है। परियोजना आर्थिक रूप से पिछड़े ग्रामीण समुदाय विशेषकर महिलाओं को आजीविका वर्धन की विभिन गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के हर सम्भव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में परियोजना के अंतर्गत वनमण्डल एवम वन परिक्षेत्र मण्डी के ग्राम वन विकास समिति बालासुंदरी में जागृति स्वम सहायता समूह के लिए दो दिवसीय खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जिसमें महिलाओं ने विभिन्न प्रकार के खाने के उत्पाद जैसे जिसमें सीरा ,सेपु बड़ी, सोया पनीर, सोया दूध, पपीते के पापड़, सोयाबीन नमकीन, आंवले की चटनी, सेब का जैम, आवंला कैंडी इत्यादि सीखने के लिए कौशल आधारित प्रशिक्षण का लाभ लिया, कृषि विज्ञान केंद्र सुंदर नगर की रिसोर्स पर्सन डॉ कल्पना इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य तौर पर मौजूद रही। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कौशल आधारित प्रशिक्षण में पुरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस अवसर पर वन विभाग व परियोजना के कर्मचारी मौजूद भी रहे।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश के 7 जिलों ( किन्नौर ,शिमला ,बिलासपुर ,मंडी ,कुल्लू , लाहौल स्पीति व कांगड़ा ) के 9 वनवृतों , 22 वनमंडलो , 72 वन परिक्षेत्रों में कार्यन्वित की जा रही है। यह परियोजना ग्रामीण महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। परियोजना के द्वारा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को घर द्वार पर उत्तम किस्म का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसमें विभिन कार्य शामिल हैं जैसे चीड़ की पतियों से सजावटी उत्पाद , सीरा , सेपू बड़ी , दुग्ध के उत्पाद , टौर के पत्तों की पत्तलें बनाना , मधुमखी पालन ,मशरुम उत्पादन इत्यादि।
परियोजना के आने से पहले स्वयं सहायता समूह नाममात्र की आजीविका प्राप्त कर रहे थे। परियोजना के आने के बाद स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उत्तम तरीके का प्रशिक्षण परियोजना के विशेषज्ञों द्वारा दिया जाता है। महिलाओं द्वारा अपने रोजमर्रा के कार्यों एवं घरेलू कार्यों के साथ स्वयं सहायता समूह में कार्य करके समान जनक अतिरिक्त आय अर्जित की जा रही है।
