अरविंदर सिंह, हमीरपुर: स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए दिए जाने वाला इंडियन कॉन्फेडरेशन ऑफ मेडिकल लैबोरेट्री साइंस लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड हमीरपुर के अमरनाथ शर्मा ने अपने नाम किया है। अमरनाथ शर्मा को यह पुरस्कार है स्वास्थ्य के क्षेत्र में 60 वर्षों तक दी गई अपनी बेहतरीन सेवाओं के लिए दिया जा रहा है। भारतीय चिकित्सा प्रयोगशाला विज्ञान परिसंघ की ओर से इसकी घोषणा की गई है। परिसंघ एक भारतीय चिकित्सा प्रयोगशाला पेशेवर संघों की राष्ट्रीय पंजीकृत एसोसिएशन है।
आईसीएमएलएस पुरस्कार समिति की ओर से इस अवार्ड के लिए देश भर से 4 ऐसे लोगों का नाम तय किया गया है जो स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। यह चारों पुरस्कार अलग-अलग क्षेत्र में किए गए बेहतरीन कार्यों के लिए दिया जा रहा है। जिन चार व्यक्तियों का चयन इन पुरस्कार के लिए किया गया है उसमें अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए पूंड्डुचेरी के डीसी आनंद, बेस्ट लैबोरेटरी प्रैक्टिस अवार्ड डॉ. सुरेंद्र कुमार शर्मा पीजीआई एमईआर चंडीगढ़, संगठनात्मक उत्कृष्टता पुरस्कार राज सिंह, टोंक फरीदाबाद हरियाणा ओर लाइफ-टाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिए हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के अमरनाथ शर्मा को चुना गया है जो अपने आप में ही बहुत बड़ी उपलब्धि है। हालांकि आईसीएमएलएस की ओर से यंग साइंटिस्ट अवार्ड भी दिया जाना था लेकिन इसके लिए कोई उपयुक्त उम्मीदवार ना मिलने के चलते इस बार यह अवार्ड नहीं दिया जा रहा है।
अमरनाथ ने लैबोरेटरी के क्षेत्र में आईजीएमसी शिमला में जहां बतौर लेक्चरर अपनी सेवाएं दी हैं वहीं पीजीआई चंडीगढ़ में भी उन्होंने सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने पीजीआई से ही अपने करियर की शुरुआत की थी। अमरनाथ शर्मा मास्टर ऑफ साइंस मेडिकल टेक्नोलॉजी है। वे पीजीआई चंडीगढ़ के मेडिकल टेक्नोलॉजी एलुमनी एसोसिएशन के लाइफ मेंबर भी है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ब्लड बैंक पीजीआई चंडीगढ़ से की थी। इसके बाद उन्होंने लैब टेक्नीशियन के तौर पर सिविल अस्पताल कुल्लू में भी सेवाएं दी। आईजीएमसी में एसआईटी के पद पर भी उन्होंने कार्य किया।
वर्तमान समय में अमरनाथ शर्मा पिछले 30 वर्षों से जिला मुख्यालय हमीरपुर में एक बड़ी लैबोरेट्री चला रहे हैं जिसमें हर छोटी बड़ी बीमारी के टेस्ट होते हैं। 90 के दशक से वह इस कार्य को कर रहे हैं जब हिमाचल में बेहद कम लैब होती थी। अमरनाथ शर्मा कहते हैं कि उन्होंने कभी भी इस कार्य को पैसे कमाने का जरिया नहीं समझा बल्कि उन्होंने मरीजों के दर्द को महसूस किया और जनसेवा की सोच के साथ ही इस कार्य को किया हैं।
