शिमला (एकता): हिंदू धर्म में नवरात्रि का काफी योगदान है और हर भक्त को इसका काफी बेसब्री से इंतजार रहता है। वैसे तो नवरात्रि साल में 4 बार आती हैं। जिनमें दो गुप्त नवरात्रि और दो प्रत्यक्ष नवरात्रि होती हैं लेकिन शारदीय नवरात्रि की हमारे शास्त्रों में विशेष महत्ता बताई गई है। इन 9 दिनों के दौरान देवी दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है।
इस बार महानवमी पर बेहद खास बन रहा योग
4 अक्टूबर यानि आज महानवमी का आखिरी दिन है। नौ दिनों तक चलने वाला शुभ त्योहार शरद नवरात्रि पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जा रहा है। नवरात्रि की महानवमी इस बार बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इस दिन खास योग बन रहा है। 5 अक्टूबर 2022 को दशहरा पर देवी का विसर्जन कर उन्हें विदाई दी जाएगी। दुर्गा नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। आज कई भक्त कन्या पूजन कर शुभ मुहूर्त में हवन करते हैं और फिर व्रत का पारण किया जाता है। कहते हैं नवमी पर मां की पूजा, मंत्र जाप, हवन करने से सफलता की प्राप्ति होती है।
मां सिद्धिदात्री की महिमा
कमल पर विराजमान देवी सिद्धिदात्री की चार भुजाएं हैं, जिसमें गदा, कमल, शंख और सुदर्शन चक्र विद्यमान है। मान्यता है कि मां दुर्गा की नौवी शक्ति देवी सिद्धिदात्री की पूर्ण श्रृद्धा से आराधना करने पर अष्ट सिद्धि और नव निधि, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।
नवमी के दिन होती है मां की विदाई
मान्यता है कि एक महिषासुर नाम का राक्षस था, जिसने चारों तरफ हाहाकार मचा रखा था। उसके भय से सभी देवता परेशान थे। उसके वध के लिए देवी आदिशक्ति ने दुर्गा का रूप धारण किया और 8 दिनों तक महिषासुर राक्षस से युद्ध करने के बाद 9वें दिन उसको मार गिराया। जिस दिन मां ने इस अत्याचारी राक्षस का वध किया, उस दिन को महानवमी के नाम से जाना जाने लगा। महानवमी के दिन महास्नान और षोडशोपचार पूजा करने का रिवाज है। ये पूजा अष्टमी की शाम ढलने के बाद की जाती है। दुर्गा बलिदान की पूजा नवमी के दिन सुबह की जाती है। नवमी के दिन हवन करना जरूरी माना जाता है क्योंकि इस दिन नवरात्रि का समापन हो जाता है। मां की विदाई कर दी जाती है।
जानिए मां सिद्धिदात्री का प्रिय भोग और शुभ रंग
मां सिद्धिदात्री को चने, पूड़ी, हलवे का भोग पसंद है। नवमी के दिन यही भोजन कन्याओं को भी खिलाया जाता है। देवी मां को चंपा, कमल या गुड़हल का फूल अर्पित किया जाता है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा में गुलाबी रंग बहुत शुभ माना गया है।
मां सिद्धिदात्री मंत्र
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्। कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम॥
