कुल्लू : मनमिंन्द्र अरोड़ा – देश में आज शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव जरूरी है और पुराने गुरुकुल शिक्षा पद्धति का भी अब छात्रों को ज्ञान होना चाहिए। ऐसे में जालंधर में 9 जून से 11 जून तक बदलाव को लेकर एक महाकुंभ आयोजित किया जाएगा। जिसमें देशभर के विभिन्न शिक्षाविद, मुख्यमंत्री, कुलपति भाग लेंगे।
ढालपुर में पत्रकारों को जानकारी देते हुए शिक्षा महाकुंभ के विचारक इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर ठाकुर सुदेश कुमार रौनिजा ने कहा कि आज आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ पुरानी शिक्षा पद्धति की भी जरूरत है और शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के बीच कौशल विकास भी किया जाना जरूरी है। ताकि अगर छात्र बीच में अपनी शिक्षा छोड़ दें तो वे अपने कौशल के माध्यम से अपने लिए रोजगार की राह तलाश सके। ऐसे में विश्व का पहला शिक्षा महाकुंभ जालंधर में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विद्या भारती के तत्वावधान में NIT जालंधर में 9-11 जून को होने जा रहे विश्व के पहले शिक्षा महाकुंभ की तैयारियों के सिलसिले में कुल्लू जिले के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों एवं प्रबंधकों से बातचीत की। इस महाकुंभ में समस्त देश के शिक्षा मंत्रियों, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों एवं केंद्र के शिक्षा एवं युवा कार्यों के मंत्रियों के साथ-साथ 1476 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, 161 नॅशनल इम्पॉर्टन्स के संस्थानों निदेशकों को आमंत्रित किया रहा है। जिसमें से कई दर्जन राज्यपाल, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री अब तक आने की स्वीकृति दे चुके है। उन्होंने जानकारी दी कि इस महाकुंभ में पूरे देश से लगभग 6 लाख शिक्षक, अभिभावक, शिक्षार्थी, उद्योगपति, वैज्ञानिक, आदि ऑनलाइन मोड़ में जुड़ेंगे और 20000 के आसपास ऑफ़लाइन मोड में भाग लेंगे।डॉक्टर रौनिजा ने बताया कि इस महाकुंभ में पाँच बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी।
