मनाली (सचिन शर्मा): लाहौल घाटी में 15 हजार फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर की दरार में फंसा एक बैंगलुरू के ट्रैकर का शव रेस्क्यू किया गया है। बता दें कि इस शव को निकालने के लिए 68 दिन लगे। 14 जून को लाहौल-स्पीति के बातल से ऊपर 5300 मीटर की ऊंचाई पर पर्वतारोही गिर गया था। यह बड़ी सफलता अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतरोहण संस्थान के जवांजों ने हासिल की है, जिन्होंने इतनी ऊंचाई से इस शव को रेस्क्यू किया।

रेस्क्यू टीम ने बताया कि ज्यादा बर्फ और मौसम खराब होने के चलते शव को निकालने के लिए एक सप्ताह लगा। मीडिया सूत्रों के हवाले से बेंगलुरु का पर्वतारोही अपने दोस्तों के साथ सीबी 13 चोटी को फतेह निकला था। ट्रैकर के परिवार ने प्रशासन से दोबारा मदद की गुहार लगाई थी। पर्वतारोही दल के पास पर्याप्त उपकरण न होने के कारण टीम के सदस्य अपने पर्वतारोही साथी की मदद नहीं कर पाए। संस्थान की 11 सदस्यीय टीम ने शव को निकालने में सफलता पाई। मनाली के अटल बिहारी संस्थान के निदेशक अविनाश नेगी ने कहा कि लाहौल-स्पीति प्रशासन के आग्रह पर संस्थान के जांबाजों ने हिम्मत दिखाई और ग्लेशियर की दरार में गिरे ट्रैकर के शव को बाहर निकाला है।

11 सदस्यीय टीम में वरिष्ठ हिम बचाव अनुदेशक लुदर सिंह, पर्वतरोहण पर्यवेक्षक मोहन लाल व जितेंद्र, पर्वतरोहण अनुदेशक पवन कुमार, भुवनेश्वर दास, स्की अनुदेशक अंकुश कुमार,देश राज, दीना नाथ, अतिथि प्रशिक्षक अमर नेगी, भाग चन्द व जोगिंद्र ने हिम्मत दिखाते हुए ग्लेशियर की दरार में गिरे ट्रेकर वेद व्यास के शव को निकालने में सफलता पाई। संस्थान के निदेशक अविनाश नेगी ने अपने जवांजों के हौसले की प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्थान को अपनी इस टीम पर गर्व है। उन्होंने कहा कि लाहौल स्पीति प्रशासन के अनुरोध पर संस्थान के इन जावांजो ने हिम्मत दिखाई और ग्लेशियर की दरार में गिरे ट्रेकर के शव को बाहर निकालने में सफलता पाई। उन्होंने कहा कि संस्थान अपने आधुनिक संस्थानों के साथ हर चुनौती को स्वीकार करने में समर्थय रखता है।

