संजु चौधरी,शिमला: इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश लेने का मामला सामने आया हैं। मामले में पुलिस की ओर से फर्जी दस्तावेजों पर एडमिशन लेने वाले युवक को भी गिरफ्तार कर लिया गया हैं। पुलिस ने यह कार्रवाई आईजीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. सीता ठाकुर की तरफ से मिली शिकायत के बाद की हैं। मामला एमबीबीएस में एडमिशन का हैं जिसमें एक छात्र ने फर्जी दस्तावेज से एमबीबीएस में एडमिशन ले ली, लेकिन जब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन हुई तो छात्र के डॉक्यूमेंट नकली पाए गए।
आरोपित छात्र इतना शातिर निकला की इसने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ओर से एमबीबीएस में प्रवेश के लिए करवाई गई प्रवेश परीक्षा (नीट) के रिजल्ट में ही छेड़छाड़ कर खुद ही फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किया। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर वह अटल मैडिकल विश्वविद्यालय नेरचौक मंडी में आयोजित काउंसलिंग में शामिल हुआ। झूठे दस्तावेज के आधार पर उसका दाखिला आईजीएमसी शिमला में कंफर्म हो गया। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने कॉलेज में एडमिशन ली और नियमित कक्षाएं भी लगाना शुरू कर दिया था। आईजीएमसी शिमला प्रदेश के अन्य सभी मेडिकल कॉलेजों में श्रेष्ठ हैं जहां आरोपित छात्र ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ही प्रवेश एमबीबीएस में हासिल कर लिया।
आरोपित बिलासपुर जिला के घुमारवीं का रहने वाला हैं। इसने जिस नाम के सर्टिफिकेट के साथ छेड़छाड़ की वह एक छात्रा का हैं। मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने इसे कॉलेज से निष्कासित कर दिया हैं। वहीं इसके खिलाफ लक्कड़ बाजार चौकी में शिकायत दर्ज करवाई गईं है जिसके आधार पर पुलिस ने छात्र को गिरफ्तार कर आगामी छानबीन शुरू कर दी हैं।
छानबीन में एक हैरानी वाली बात भी सामने आई है। छात्र के परिवार से अधिकतर डॉक्टर के पेशे में है जिसके चलते परिवार वालों ने छात्र पर डॉक्टर बनने का दबाव बनाया है और नतीजन न चाहते हुए भी छात्र ने फर्जी दस्तावेज़ बनाकर एमबीबीएस में एडमिशन ली। जिसके लिए छात्र के साथ-साथ परिवार भी काफी हद तक ज़िम्मेवार हैं।
